मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा के पेश होने में अब बस एकाध दिन का समय बचा है और बाजार में भयंकर ऊहापोह है कि इस बार क्या होनेवाला है। इसका संकेत इस बात से मिलता है कि बाजार के बेंचमार्क दस साल की परिपक्वता वाले सरकारी बांडों का भाव बुधवार को एक समय गिरकर 91.37 रुपए (अंकित मूल्य 100 रुपए) और यील्ड की दर बढक़र 7.60 फीसदी पर चली गई, जबकि सोमवार को इन बांडोंऔरऔर भी

आम निवेशकों से करोड़ों की रकम जुटाकर लापता हो चुकी 121 कंपनियों की सूची तो कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने बड़ी प्रमुखता से अपनी वेबसाइट पर पेश कर रखी है। इसमें बताया गया है कि कैसे कोलकाता की वेस्टर्न इंडिया इंडस्ट्रीज निवेशकों से 232.60 करोड़ जुटाकर लापता हो चुकी है। लेकिन इस बात पर न तो मंत्रालय और न ही पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का कोई ध्यान है कि देश के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों बीएसईऔरऔर भी

कुल विदेशी निवेश में एफडीआई का हिस्सा 30.04 फीसदी है तो पोर्टफोलियो निवेश है 20.45 फीसदी। देश में दीर्घकालिक निवेश के लिए आ रही है ज्यादा पूंजी और घट रहा है हॉट मनी का हिस्सा। देश में हो रहे कुल विदेशी निवेश में प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का हिस्सा पिछले एक साल से बढ़ रहा है और अब यह पोर्टफोलियो निवेश से ज्यादा हो गया है। भारत के अंतरराष्ट्रीय निवेश पर जारी रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट केऔरऔर भी

पिछले मार्च से इस मार्च के बीच अमेरिकी सरकार के बांडों में भारत का निवेश तीन गुना से ज्यादा हो गया है। देश की तरफ से तकरीबन 99 फीसदी निवेश भारतीय रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा खजाने से करता है। वित्तीय संस्थाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र की तरफ से किया गया निवेश एक फीसदी से भी कम रहता है। यूएस ट्रेजरी विभाग की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2008 तक अमेरिकी सरकार के बांडों मेंऔरऔर भी

मंदी से मुक्त माना जानेवाला माइक्रो फाइनेंस क्षेत्र भी अब आर्थिक सुस्ती का शिकार हो गया है। इस क्षेत्र को बैंकों से मिलनेवाला धन कुछ साल पहले तक मिल रहे धन का अब मामूली हिस्सा रह गया है। बैंक माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं (एमएफआई) को बगैर बैलेंस शीट देखे कर्ज देने से मना कर रहे हैं। इससे छोटी एमएफआई के लिए भारी मुसीबत पैदा हो गई है क्योंकि वे आमतौर पर बैलेंस शीट नहीं बनाती। केवल बड़ी एमएफआईऔरऔर भी

देश में म्यूचुअल फंडों के निवेशकों की संख्या 4.33 करोड़ है जिनमें से 4.20 करोड़ (96.86 फीसदी) आम निवेशक है, जबकि कॉरपोरेट व संस्थागत निवेशकों की संख्या महज 5.02 लाख  (1.16 फीसदी) है। लेकिन म्यूचुअल फंडों की शुद्ध आस्तियों में से 56.55 फीसदी पर कॉरपोरेट व संस्थागत निवेशकों का कब्जा है, जबकि इतनी भारी तादाद के बावजूद इसमें आम निवेशकों की हिस्सेदारी महज 36.93 फीसदी है। वह भी तब, जब संस्थागत निवेशकों में अनिवासी भारतीय और विदेशीऔरऔर भी

पिछले साल मार्च की तुलना में इस बार एक चौथाई ही मिला कर्ज। दुनिया में छाए आर्थिक संकट के चलते भारतीय कंपनियों के लिए विदेश से उधार लेने का स्रोत सूखता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2009 में 42 कंपनियों या वित्तीय संस्थानों ने विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के जरिए 111.38 करोड़ डॉलर ही जुटाए हैं, जबकि मार्च 2008 में 50 कंपनियों या वित्तीय संस्थानों ने 447.67 करोड़ डॉलर जुटाएऔरऔर भी

चिदंबरम व रामदौस की अध्यक्षता में बने आयोग ने बीकासूल और डाइजीन समेत दस दवा दवाओं को अगस्त 2005 में ही फालूत करार दिया था। डाइजीन, कॉम्बीफ्लेम, डेक्सोरेंज, बीकासूल, लिव-52, कोरेक्स जैसी दस दवाओं को अगस्त 2005 में केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. ए. रामदौस की अगुवाई में बने एक आयोग ने बेतुकी और गैर जरूरी, यहां तक कि खतरनाक बताया था। इस आयोग की रिपोर्ट सरकार स्वीकार भी कर चुकी है। लेकिन करीबऔरऔर भी

रिजर्व बैंक रेपो और रिवर्स रेपो दरों में बार-बार कमी किए जाने बावजूद बैंकों के कर्ज की रफ्तार न बढऩे से चिंतित है। तीन हफ्ते पहले ही रिवर्स रेपो दर को घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया गया है, फिर भी बैंक उसके पास इसके तहत हर दिन हजारों करोड़ रुपए जमा करा रहे हैं। रिजर्व बैंक बैंकों को ऐसा करने से रोकने के लिए तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत हर दिन दो बार खोली जानेवाली यहऔरऔर भी

सियाराम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पाणी। दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करो क्योंकि सृष्टि के कण-कण में राम हैं, भगवान हैं। अच्छा है। परीक्षा में प्रश्नपत्र खोलने से पहले बच्चे आंख मूंदकर गुरु या भगवान का नाम लेते हैं। अच्छा है। नए काम का श्रीगणेश करने से पहले माता भगवती के आगे धूप-बत्ती जला लेते हैं। अच्छा है। क्या बुराई है। हम किसी का कुछ बिगाड़ तो नहीं रहे। एक बार गांव में एकऔरऔर भी