अपने शेयर बाजार में, लगता है जैसे तूफान के पहले की शांति चल रही है। दिन के दिन में 2 फीसदी से ज्यादा उछल जानेवाले सूचकांक सीमित दायरे में बंध कर रह गए हैं। जैसे, शुक्रवार 2 नवंबर को निफ्टी नीचे में 5682.55 से ऊपर में 5711.30 तक, यानी 28.75 अंक के दायरे में ही घूम गया। सेंसेक्स का भी यही हाल है। महीने भर पहले 3 अक्टूबर को सेंसेक्स 18,869.69 पर बंद हुआ था तो 2औरऔर भी

हर शेयर अपने आप में एक कहानी कहता है। उसका भाव बीते कल का ही नहीं, आनेवाले कल का भी संकेत देता है। लेकिन एक बात तमाम कोशिशों के बावजूद परदे में रह जाती है। और, वो है कि कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस की स्थिति। मतलब यह कि प्रबंधन कैसा चल रहा है? प्रवर्तकों का रवैया क्या है? वे कंपनी को लोकतांत्रिक तरीके से चला रहे हैं या इतने सारे शेयरधारकों के साथ लिस्टेड होने के बावजूदऔरऔर भी

दुनिया में नाम कमाने के लिए कभी कोई फूल नहीं खिलता। कोई विद्रोही कभी नाम कमाने के लिए शहीद नहीं होता। लेकिन ज़मीन में गड़ी हुई देहों की ख़ाक से, शरीर की मिट्टी से, धूल से, खिलेंगे गुलाबी फूल। सही है कि विद्रोही अनाम ही रह जाएगा।और भीऔर भी