आपको बहुतेरे लोग कहते मिल जाएंगे कि अच्छा-खासा स्टॉक भी उनके खरीदते ही गिरने लगता है। उन्हें लगता है कि शेयरों में कमाई किस्मत का खेल है। लेकिन दुनिया के दिग्गज ट्रेडरों का अनुभव बताता है कि यहां का मूल मंत्र कौशल और अनुशासन है। किस्मत तो कतई नहीं। किसी चमत्कारी इंडीकेटर या थ्योरी की खोज भी यहां बेमानी है। मायने है तो इसका कि आपने ट्रेडिंग के कौशल को कितना निखारा है। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

हम सभी खुद को भीड़ से अलग समझते हैं। लेकिन आफत या अफरातफरी की हालत में भीड़ जैसा ही बर्ताव करते हैं। जब तक हम भीड़-सा बर्ताव करते रहेंगे, तब तक शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नहीं कमा सकते। यह कोई दुस्साहसी काम नहीं है जिसमें लीक छोड़कर भीड़ से उलटा चलना पड़ता है। लेकिन यहां भीड़ से ऊपर उठना ज़रूरी है ताकि हम भीड़ की चाल को भांप सके। टेक्निकल एनालिसिस इसमें मददगार है। अब आगे…औरऔर भी

शुक्रवार शाम शेयर बाज़ार पर आयोजित एक सेमिनार में गया था ताकि कुछ नया सीख सकूं और आपको सर्वोत्तम सलाह दे सकूं। वहां 60-65 साल के एक परेशान निवेशक ने तैश में आकर कहा कि जिस किसी से सात जन्मों की दुश्मनी निकालनी हो, उसका पैसा शेयरों में लगवा देना चाहिए। बड़े कड़वे अनुभव से गुजरी है उनकी पीढ़ी। आज भी मूल फिक्र पूंजी बढ़ाने से ज्यादा, उसे बचाने की है। इसलिए आज एक सुरक्षित लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

चाहे हम नियमित आय के लिए शॉर्ट-टर्म ट्रेड कर रहे हों या दौलत जुटाने के लिए लांग-टर्म निवेश कर रहे हों, हमारा लक्ष्य यही है कि हम कम से कम जोखिम में अधिक से अधिक मुनाफा कैसे कमा सकते हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी है भावों के उस स्तर की सटीक शिनाख्त जहां से कोई स्टॉक या बाज़ार तेज़ी से पलटता है। दरअसल, इन टर्निंग प्वाइंट्स को पकड़ना ही न्यूनतम रिस्क उठाकर अधिकतमऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है। इसमें बराबर हर सौदे में मुनाफा कमाना संभव नहीं। यह दुनिया भर के अनुभवी ट्रेडरों का सबक है। कई बार घाटा उठाना पड़ता है। यह घाटा न्यूनतम हो, इसके लिए स्टॉप-लॉस का अनुशासन बना है। इसलिए हर ट्रेड में एंट्री के साथ-साथ स्टॉप-लॉस का स्तर तय करना ज़रूरी है। दरअसल, स्टॉप-लॉस के घाटे को इस बिजनेस की लागत माना जाता है। अब उतरते हैं आज के बाज़ार में…औरऔर भी