आज मार्च के डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन है। डेरिवेटिव्स का खेल उस्तादों का है। वे स्टॉक ऑप्शंस व फ्यूचर्स के अलावा निफ्टी तक में खेलते हैं। लेकिन इधर आम लोग भी निफ्टी ऑप्शंस/फ्यूचर्स में खेलने लगे तो धंधेबाज़ चरका पढ़ाने में लग गए हैं। एक ‘विशेषज्ञ’ कहते हैं कि मार्च निफ्टी 6600 से 6700 के बीच निपटेगा। जहां 10-15 अंक पर मार होती है वहां 100 अंकों का दायरा! इनसे बचिए आप। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

अगर देश ही नहीं, पूरी दुनिया में सर्वे कराया जाए कि बिजनेस न्यूज़ चैनल देखनेवाले कितने लोग ट्रेडिंग से कमाते हैं तो यकीन मानिए कि नतीजा होगा: कोई नहीं, शत-प्रतिशत घाटा खाते हैं। इसका एक कारण यह है कि न्यूज़ जब तक इन चैनलों तक पहुंचती है, तब तक वो बेअसर होकर उल्टी दिशा पकड़ चुकी होती है। दूसरा यह कि यहां न्यूज़ को सनसनीखेज़ बनाने के लिए अतिरंजित कर दिया जाता है। अब बुधवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जान-पहचान बहुतों से होती है। लेकिन गहरी दोस्ती कम ही लोगों से होती है और गाढ़े-वक्त में गहरे दोस्त ही काम आते हैं। यही बात शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। जान-पहचान तो आपकी तमाम शेयरों से होनी चाहिए। पर कुछ शेयरों से इतनी तगड़ी पहचान होनी चाहिए कि आप उनकी हर चाल-ढाल और नाज़-नखरे से वाकिफ हों। ट्रेडिंग पचास में नहीं, इन्हीं पांच-दस शेयरों में कीजिए तो मुनाफा कमाएंगे। अब वार मंगल का…औरऔर भी

निवेश के लिए भावों का चार्ट देखना ज़रूरी नहीं। लेकिन ट्रेडिंग करनेवालों का काम इसके बिना नहीं चलता। बहुत से लोग शेयरखान में एकाउंट खुलवाते हैं ताकि उसके साथ उन्हें ट्रेड टाइगर सॉफ्टवेयर मुफ्त में मिल जाए। चार्ट पर टेक्निकल एनालिसिस के सारे संकेतक, जो बीत चुका है, जो निर्जीव है, उसे दिखाते हैं। असली चुनौती जो अदृश्य है, सौदों के पीछे जो लोग है, उन्हें देखने की है। आगे की दृष्टि के साथ करते हैं आगाज़…औरऔर भी

देश के कोने-कोने में छोटे-छोटे कस्बों व शहरों के लोग रिस्क तो लेते है। तभी तो स्पीक एशिया या सारधा जैसी फर्में हज़ारों-हज़ार करोड़ जुटा लेती हैं। लेकिन सरकार अंदर से नहीं चाहती कि लोग ऐसा रिस्क लें जिसमें उनका और देश के औद्योगिक विकास, दोनों का भला हो क्योंकि ऐसा होगा तो डाकघर व बैंकों में रखी हमारी बचत का बड़ा हिस्सा उसे सस्ते कर्ज के रूप में नहीं मिलेगा। आज तथास्तु में एक मिड-कैप कंपनी…औरऔर भी