सब कुछ नया-नया। वित्त वर्ष 2014-15 का आगाज़। अभी तक रिजर्व बैंक साल के शुरू में सालाना मौद्रिक नीति पेश किया करता था। फिर उसी के फ्रेम में तिमाही और बीच में मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा पेश करता था। लेकिन समय की गति इतनी बढ़ गई कि रिजर्व बैंक अब हर दो महीने पर मौद्रिक नीति लाना शुरू कर रहा है। आज वित्त वर्ष के पहले दो महीनों की नीति आएगी। अब आज का स्वागतम ट्रेड…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग के लिए खुद को स्विच-ऑन या स्विच-ऑफ नहीं कर सकते, किसी दिन ट्रेडिंग न करने पर आप परेशान हो उठते हैं तो आप ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस-ऑर्डर का शिकार हैं। मनोविज्ञान में इसे एक तरह का रोग माना गया है। पहले स्वसाधना से खुद को इस रोग से मुक्त करें। तभी जाकर ट्रेड करें। अन्यथा यह रोग आपके एडिक्शन पर सवार होकर आपके तन मन धन सभी को तोड़ डालेगा। अब मार्च की अंतिम ट्रेडिंग…औरऔर भी

ऐसा क्यों कि कंपनी गर्त में जा रही होती है और उसके प्रवर्तकों की मौज बढ़ती रहती है? सुज़लॉन एनर्जी की वित्तीय हालत और उसके शेयर की दुर्गति आप जानते होंगे। छह साल में शेयर 446 से 9.70 रुपए पर आ चुका है। लेकिन उसके प्रवर्तक तुलसी तांती ने अपनी सालाना तनख्वाह दो करोड़ से बढ़ाकर सीधे तीन करोड़ कर ली! हमें ऐसे प्रवर्तकों की कंपनियों से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

जीवन के संघर्ष में जीतने के लिए आशावाद बेहद ज़रूरी है। निवेशकों का पूरा साथ पाने के लिए कंपनियों का आशावादी होना और आशावाद का माहौल बनाए रखना भी जरूरी है। इसीलिए कंपनियां भावी धंधे व मुनाफे का अनुमान पेश करती रहती हैं। पर शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग से कमाई करनी है तो हमें आशावादी नहीं, यथार्थवादी होना पड़ता है। अनुमानों के पीछे की हवाबाज़ी को समझना पड़ता है। अब जानें शुक्र का ट्रेडिंग सूत्र…औरऔर भी