ट्रेडिंग का वास्ता कंपनी के फंडामेंटल्स या बैलेंसशीट से ज्यादा लोगों की भावनाओं को पढ़ने से हैं। वर्तमान नहीं, भविष्य पर, यथार्थ नहीं, उम्मीद पर चलते हैं भाव। तभी तो घाटे में चल रही कंपनियों के भाव भी चढ़े रहते हैं और अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर गिर जाते हैं। लोगों की भावना की ताकत बताती है टेक्निकल एनालिसिस। लेकिन पारंपरिक पद्धति की खामी यह है कि वह देर से देती है सिग्नल। हम चलें उससे आगे…औरऔर भी

जहां खटाखट पाने का लालच जितना बड़ा होता है, वहां उतनी ही तादाद में ठगों का जमावड़ा जुटता है। चाहे वो गया में पिंडदान करानेवाले पंडे हों या बनारस के खानदानी ठग। शेयर व कमोडिटी बाज़ार में लालच जबरदस्त है तो यहा भी ठगों की कमी नहीं। कोई लूटता टिप्स के नाम पर तो कोई सिखाने के नाम पर। बड़ी-बड़ी बातें। एक से एक गुरुघंटाल। आप करें चमत्कार को दूर से नमस्कार। हम देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जहां दुनिया पल-पल बदलती हो, वहां बेजान किताबी ज्ञान या कोई रूढ़ि घातक साबित हो सकती है। जैसे, ट्रेडिंग की किताबें कहती हैं कि वोल्यूम का बढ़ना ट्रेंड की निरंतरता को दिखाता है। लेकिन वोल्यूम भीड़ के टूटकर आने या निकलने से भी बढ़ता है और उसके फौरन बाद सप्लाई और डिमांड का संतुलन टूटते ही बाज़ार का रुख पलट जाता है। ध्यान रखें, नियम से सच नहीं, सच से नियम निकलते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

धन का पूरा तंत्र है। कम से कम आज की ग्लोबल दुनिया में शेयर बाज़ार को मुद्रा से स्वतंत्र मानना घातक होगा। लेकिन दोनों में सीधा रिश्ता भी नहीं कि डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत तो शेयर बाज़ार बढ़ेगा, नहीं तो घटेगा। कल रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे दिन कमज़ोर हुआ, जबकि शेयर बाज़ार तीन हफ्ते में सबसे ज्यादा बढ़ गया। तेल आयातकों की डॉलर मांग बढ़ी तो गिरा रुपया। देखते हैं कहां लगी सबकी नज़र…औरऔर भी