ट्रेडिंग में कोई एक रणनीति हर वक्त काम नहीं करती। जनवरी में स्ट़ॉक चुनने से लेकर ट्रेडिंग का जो तरीका था, वह चार महीने बाद मई तक आते-आते बदल गया। अब मोदी सरकार का पहला आम बजट आने में महज एक हफ्ता बचा है तो इन दिनों की ट्रेडिंग रणनीति अलग होगी। बदलते हालात में जो स्थाई चीज़ है, वो है लचीलापन। हमारी ट्रेडिंग मानसिकता का जरूरी तत्व होना चाहिए लचीलापन। अब करें शुरू गुरु का अभ्यास…औरऔर भी

हम सभी व्यक्तिगत ट्रेडर हैं। शेयर बाज़ार के घराती नहीं, बराती हैं। हम खुद कुछ नहीं बनाते। दूसरों के बनाए पर खेलते हैं। इन दूसरों में 9275 ब्रोकर, 51707 सब ब्रोकर, 1709 विदेशी संस्थागत निवेशक व उनके 6391 सब एकाउंट, 50 म्यूचुअल फंड, 207 वेंचर कैपिटल फंड और बीसियों बैंकों के साथ हज़ारों प्रोफेशनल ट्रेडर व एचएनआई शामिल हैं। इन सभी की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए ही हमें ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाजार में एक उन्माद-सा छाया हुआ है। लोग खरीदने का फैसला कर चुके हैं। बस, वजह की तलाश है। सेंसेक्स साल के पहले छह महीने में 20.21% बढ़ गया, जबकि इस दौरान अमेरिका का बाज़ार 6.1% और जर्मनी का बाज़ार 2.8% ही बढ़ा है। विदेशी निवेशक भारत में 1000 करोड़ डॉलर से ज्यादा झोंक चुके हैं। बीएसई-500 के करीब 100 मिड व स्मॉलकैप स्टॉक्स पिछले छह महीने में दोगुने हो चुके हैं। ऐसे में बढ़ें ज़रा संभलकर…औरऔर भी

ट्रेडिंग एक हुनर है, जो जन्मजात नहीं, बल्कि सीखा जाता है। हरेक कामयाब ट्रेडर को निरपवाद रूप से सीखने के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस धंधे में कोई एंट्री-बैरियर नहीं। आपकी पृष्ठभूमि क्या है, उम्र क्या है, अनुभव है कि नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता। कोई भी शख्स अध्ययन, मनन व अभ्यास से कामयाब ट्रेडर बन सकता है, बशर्ते सही सोच और पूरा समर्पण हो। चलिए, बढ़ें सोमवार की ओर…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेश के रिस्क को भगवान भी नहीं मिटा सकता। कंपनी का मालिक तक नहीं जानता कि कौन-सी आकस्मिकता उसके सालों से जमे धंधे को ले बीतेगी। इसलिए यहां से लक्ष्य पूरा होते ही धन निकाल कर ज़मीन, सोने या एफडी जैसे सुरक्षित माध्यम में लगा दें। दूसरे, ज्यादा घाटा भी न सहें। कोई शेयर 25% गिर गया तो बेचकर निकल लें क्योंकि उतना भरने के लिए उसे 33.33% बढ़ना पड़ेगा। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी