सूत्र तो घनेरों, चुनौती है अमल की
ट्रेंड के साथ चलो। बाज़ार बढ़ रहा है तो खरीदो, गिर रहा है तो शॉर्ट करो। ऐसे घनेरों सूत्र और आइडिया हैं ट्रेडिंग के। लेकिन कामयाबी का सूत्र छिपा है उनके अमल में। मसलन, ट्रेंड के सूत्र की सबसे शुरुआती बात है कि आप उसे नापेंगे कैसे? कौन-सा मूविंग औसत निकालेंगे, सिम्पल या एक्पोनेंशियल और उनका टाइमफ्रेम क्या होगा? फिर जहां से बाज़ार मुड़नेवाला है, उसे कैसे पकड़ेगे? कुछ ऐसे ही हालात में आगाज़ नए हफ्ते का…औरऔर भी
अच्छों की बरक्कत, बुरों का बेड़ा गर्क
अच्छी कंपनियों के शेयर बढ़ते हैं, हवाबाज़ कंपनियों के डूबते हैं। यह सबक है अपनी चार साल की यात्रा का। ठीक चार साल पहले बीएएसएफ खरीदने की सलाह दी थी, जबकि वो 52 हफ्ते के शिखर 489.20 पर था। अभी 830.70 पर है, 490 उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम और 913.90 उच्चतम स्तर है। वहीं एक पंटर का बताया डेक्कन क्रोनिकल तब के 139 से अब 2.65 पर आ चुका है। तथास्तु में एक संभावनामय अच्छी कंपनी…औरऔर भी
उम्मीदें बिखरीं, करते रहो व्याख्या
कालिदास के झापड़ मारने के लिए उठे पंजे को पंच महाभूत और घूसे को एकल ब्रह्म बताने जैसी विद्वानों की व्याख्याओं को छोड़ दिया जाए तो मोदी सरकार के पहले बजट में ऐसा कुछ नहीं जिसकी उम्मीद बाज़ार महीनों से संजोए हुए था। उम्मीद से नाउम्मीदी के बीच निफ्टी 3.32% या 252 अंक ऊपर-नीचे हुआ। कुछ तो होगा, की उम्मीद में दो बजे के आसपास उठने की कोशिश की। पर अंततः लुढ़क गया। शुक्र को क्या होगा…औरऔर भी
पूंजी सलामत तो आएंगे मौके बहुतेरे
बजट का दिन। आसमान चढ़ी उम्मीदों की परीक्षा का दिन। हो सकता है कि आज बाज़ार 4-5% ऊपर-नीचे हो जाए। अगले दो दिन भी ज्वार-भांटा चल सकता है। लालच खींचता है कि इस उतार-चढ़ाव पर दांव लगाकर डेरिवेटिव्स से एक दिन में 100% तक बनाए जा सकते हैं। लेकिन संभल नहीं पाए तो पूरी पूंजी स्वाहा! ट्रेडिंग का पहला नियम है कि रिस्क को न्यूनतम करो और पूंजी को संभालो। अब करें, अभ्यास बजट के दिन का…औरऔर भी






