ट्रेडिंग से क्या उपजता है कोई मूल्य!
ट्रेडिंग हम इसलिए करना चाहते हैं ताकि पैसा बना सकें। पैसा इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि दुनिया में अपने व अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि और सुरक्षा के साधन जुटा सकें। आम व्यापार में लोगों तक उनके काम की चीजें पहुंचाकर हम मूल्य-सृजन करते हैं। लेकिन क्या शेयरों की ट्रेडिंग से ऐसा मूल्य-सृजन होता है? इसमें तो पैसा एक की जेब से निकलकर दूसरे के पास ही पहुंचता है! गंभीरता से सोचिए। नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी
छोटे हुए तो महंगे तो पकड़ें बड़ों को
स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी
मोदी वहां नहीं, फिर भी बढ़ा बाज़ार!
बाज़ार भले ही 25 अप्रैल से बिकवाली का शिकार हो। लेकिन निफ्टी जिस तरह 4 फरवरी से 23 अप्रैल के बीच 14% बढ़ा, उसका श्रेय ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ को दिया जा रहा है। यह कौआ कान ले गया, सुनकर कौए के पीछे दौड़ पड़नेवाली बात है क्योंकि इसी दरमियान तुर्की का बाज़ार 20%, ब्राज़ील का 16%, इंडोनेशिया का 19% और मलयेशिया का 18% बढ़ा है। इसलिए अंश ही नहीं, समग्र को देखिए। अब शुक्रवार का बौद्ध-ट्रेड…औरऔर भी
पहले समझो खुद को, कमाई बाद में
बाज़ार सबके लिए एक है। स्टॉक्स की लिस्ट और उनसे बने सूचकांक सबके लिए एक हैं। लेकिन हर दिन वहां से कुछ लोग रोते हुए निकलते हैं तो कुछ खिलखिलाते हुए। जाहिर है कि हर ट्रेडर की गति उसकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर है, न कि बाज़ार की वस्तुगत स्थिति पर क्योंकि उठना-गिरना तो बाज़ार का शाश्वत स्वभाव है। इसलिए कुछ जानकार लोग कहते हैं कि ट्रेडिंग खुद को खोजने जैसा काम है। अब खोज गुरुवार की…औरऔर भी






