अभी तो बचना है लालच की फांस से
निवेश ही नहीं, ट्रेडिंग में भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदा कैसे कमाया जाए। तभी तो हमने इंट्रा-डे को दरकिनार कर स्विंग ट्रेड के ऊपर से शुरुआत की। किसी दिन हम कैश सेगमेंट में बाज़ार की चालढाल को ठीक से समझने लगेंगे तो डेरिवेटिव्स में भी हाथ लगा सकते हैं। पर अभी उसमें घुसना बच्चे को स्पोर्ट्स कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा देने जैसा होगा। अब तराशते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
इतना रिटर्न दूसरा दे तो करेंगे बंदगी!
बाज़ार में ईद की छुट्टी है तो सोचा कि चलते-चलते इस साल के छह महीने की समीक्षा कर ली जाए। ट्रेडिंग सलाह सेवा अल्पकालिक है और अलग-अलग लोगों के रेस्पांस पर निर्भर है। इसलिए उसकी वस्तुपरक समीक्षा संभव नहीं। लेकिन दीर्घकालिक निवेश की सेवा, तथास्तु की समीक्षा की जा सकती है। कमाल की बात है कि 5 जनवरी से 22 जून तक प्रस्तुत 25 में से 22 कंपनियों के शेयर बढ़े हैं। 88% का जबरदस्त स्ट्राइक रेट…औरऔर भी
डेरिवेटिव का फंडा समझो तो आसान
पानी हमेशा नीचे भागता है तो इंसान ज्यादा फायदे की तरफ भागता है। इसीलिए नए से नया ट्रेडर भी ऑप्शंस व फ्यूचर्स में ही हाथ आजमाना चाहता है, वो भी निफ्टी के इन डेरिवेटिव्स में। मोटामोटी समझ लें कि भविष्य की अनिश्चितता को नांथने के लिए कंपनियां या व्यवसायी डेरिवेटिव्स से हेजिंग करते हैं। पर उनका रिस्क संभालते हैं ट्रेडर या सटोरिए। उनके रिस्क का सारा बोझ हम उठाते हैं। अब करते हैं नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी
सहज में न बहें, पकड़ें वही जो सही
जो सहज हो, वो सही हो, यह जरूरी नहीं। मसलन, इस समय सहज सोच यही है कि खरीदो। हम नहीं समझते कि इससे पीछे सारा खेल लालच का है। आज या कभी भी चढ़े हुए बाज़ार में सही चीज़ होनी चाहिए कि बेचकर पिछला घाटा बराबर कर लो; जो शेयर लक्ष्य पर पहुंच गए हों, उनसे धन निकालकर सुरक्षित माध्यमों में लगा दिया जाए। सहज और सही के समीकरण के बीच तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी






