रिटेल ट्रेडर कभी भारी प्रोफेशनल पर
प्रवर्तकों से मिलकर खेल करनेवाले इनसाइडर ट्रेडरों को छोड़ दें तो शेयर बाज़ार में रिटेल और प्रोफेशनल, दो ही तरह के ट्रेडर आपस में भिड़ते हैं। प्रोफेशनल ट्रेडर ज्यादा समय व संसाधन लगाता है तो उसकी स्थिति बेहतर होती है। लेकिन वो छोटे सौदों को हाथ नहीं लगा सकता। रिटेल ट्रेडर ऐसे कई मसलों में उस पर भारी पड़ता है। रिटेल ट्रेडरों को इन खासियतों को समझकर अपनी ट्रेडिंग रणनीति बनानी चाहिए। अब देखें बुधवार की धार…औरऔर भी
निफ्टी से उलट चलता है डर-सूचकांक
उन्नत बाज़ार में एक-एक हरकत को पकड़ने की व्यवस्था होती है। जो अनजान हैं, वे हवा में तीर चलाते हैं। जो जानते हैं, वे पक्की गणना के आधार पर फैसला करते हैं। जैसे, अपने यहां एक सूचकांक हैं इंडिया वीआईएक्स। यह निफ्टी के आउट ऑफ द मनी (ओटीएम) ऑप्शन के भाव पर आधारित होता है। इसे डर का सूचकांक माना जाता है। यह हमेशा निफ्टी से उल्टी दिशा में चलता है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दिशा…औरऔर भी
आत्मग्रस्तता तोड बनना है वस्तुगत
अगर आपको कमोडिटी, फॉरेक्स या शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई करनी है तो इसकी पूर्वशर्त है कि आपको चार्ट पर भावों की भाषा पढ़नी आनी चाहिए। इसके बावजूद हम अक्सर चार्ट पर वही देखते हैं जो सोचते हैं। इस आत्मग्रस्तता को भी तोड़ना पड़ता है। फिर भी आपने जो आकलन किया था, वैसा नहीं हुआ तो सिर धुनने की बात नहीं क्योंकि ऐसा सबसे साथ होता है। यह अनिश्चितता का खेल है। अब हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी
कमाना-बचाना-बढ़ाना, लक्ष्य बांधकर
कमाएंगे नहीं तो बचाएंगे क्या! बचाएंगे नहीं तो बढ़ाएंगे क्या! शेयरों में निवेश कमाने-बचाने नहीं, बल्कि जो है उसे बढ़ाने के लिए किया जाता है। हमने 4 मई को सिंटेक्स इंडस्ट्रीज़ में 45 रुपए पर तीन साल में 96 रुपए के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह दी थी। वो तीन हफ्ते में ही 85 रुपए तक पहुंच गया। जो चाहें 89% रिटर्न लेकर निकल सकते हैं। आज तथास्तु में एक बेहद जोखिम-भरा, लेकिन संभावनामय मिडकैप स्टॉक…औरऔर भी






