ट्रम्प का जवाब छद्म नहीं, खरा राष्ट्रवाद
आर्थिक विकास व समृद्धि के मामले में 18वीं सदी इंग्लैंड की रही तो 19वीं सदी अमेरिका और जर्मनी की। इनकी कामयाबी के पीछे अभिनव टेक्नोलॉज़ी के साथ ही निर्यात की अहम भूमिका थी। 20वीं सदी में एशिया के पांच देशों जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर व चीन ने निर्यात की बदौलत ही अपनी अर्थव्यस्था व नागरिक समृद्धि को चमकाया है। 21वीं सदी भारत की हो सकती है, बशर्ते वो विशाल घरेलू बाज़ार के दोहन के साथ हीऔरऔर भी
संस्थाएं हैं कमज़ोर तो कैसे होगा विकास
आखिर भारत की लक्षित ऊंची विकास दर का विकास-पथ क्या है या होना चाहिए? बराबर लम्तड़ानी करनेवाली मोदी सरकार से इसके ठोस व कारगर जवाब की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए क्योंकि उसके पास न तो भारत को विकसित बनाने की नीयत है और न ही नीतियां। वो केवल राजनीतिक सत्ता से चिपकी रहने के लिए इस नारे को जुमला बनाकर उछालती जा रही है। विकसित भारत बनाने का रास्ता वो भी नहीं है जिसकी सिफारिश विश्वऔरऔर भी
अबे मालवीय! इतना क्यों झूठ बोलता है?
देश के आर्थिक विकास को असली खतरा उस राजनीति से है जो नारा लगाकर विकास का धंधा और झूठ बोलकर जन आकांक्षाओं की निर्मम हत्या कर रही है। चार दिन पहले भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट (X) किया कि भारत ने 2015 से 2025 के बीच जीडीपी को 2.1 ट्रिलियन डॉलर से 4.3 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचा कर शानदार उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने आईएमएफ के नए डेटा को इसका आधार बताया। हकीकतऔरऔर भी
देश विकसित नहीं तो जवाब कौन देगा?
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन सी.एस. शेट्टी का कहना है कि भारत को प्रगति के लिए निश्चित रूप से 8% सालाना की गति से विकास करना होगा। इसके लिए निजी पूंजी निवेश व खपत को बढ़ाना पड़ेगा। लेकिन यह कैसे होगा? वहीं, कुछ सालों में दुनिया के सबसे अमीर से सातवें नंबर पर आ चुके माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स का कहना है कि भारत अगर 2047 तक विकसित देश बन जाए तो इससेऔरऔर भी
कितने राष्ट्रभक्त हैं मोदी और कॉरपोरेट!
मोदी सरकार चाहे तो भारत को 22 सालों में साल 2047 तक विकसित देश बना सकती है। लेकिन इसके लिए उसे देश के हवाई अड्डों से लेकर बंदरगाहों, खदानों और बहमूल्य रीयल एस्टेट को औने-पौने दाम पर अडाणी को बेचने से बाज आना पड़ेगा और अडाणी व अम्बानी जैसे तमाम अपने चहेते बड़े औद्योगिक समूहो को भारत का निर्यात बढ़ाने के काम में झोंक देना होगा। क्या हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के बड़े कॉरपोरेट समूहोंऔरऔर भी





