आंकड़े अतीत के। विश्वास कि अतीत खुद को भविष्य में दोहराएगा। फिर भविष्य का अनुमान। इसी से हम शेयर, कमोडिटी या विदेशी मुद्रा की भावी चाल का आकलन करते हैं। लेकिन जब वशिष्ट जैसे मुनि की गणना का हश्र यह हो कि सीता हरण, मरण दशरथ को, वन में विपति परी, तब औरों की क्या बिसात! सो, ट्रेडिंग में घाटा लगना अवश्यसंभावी है। यह इस धंधे की वर्किंग कैपिटल है, लागत है। परखें अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

एनएसई में हर दिन 1500 से ज्यादा कंपनियों में ट्रेडिंग होती है। इनमें से 135 कंपनियों में फ्यूचर्स व ऑप्शंस ट्रेडिंग की इजाजत है। सबसे बड़ी मुश्किल यह कि ट्रेडिंग के लिए चुनें किस-किस को चुनें? अलग-अलग उद्योग के स्टॉक्स का स्वभाव अलग और एक ही सेगमेंट के शेयरों तक की चाल अलग। चुनने के लिए उनके स्वभाव का पता लगाना होता है। स्वभाव जानने के लिए देखनी पड़ती है सालों-साल की चाल। अब बुधवार की दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग करते वक्त भावनाओं पर नियंत्रण की बात बार-बार कही जाती है। इसकी एकमात्र वजह यह है कि भावनाओं में बहकर हम सच नहीं देख पाते। और, आप जानते ही हैं कि द्रोणाचार्य जैसा गुरु व महारथी भी भावनाओं में बहता है तो धृष्टद्युम्न जैसा सामान्य योद्धा तक उसे मार देता है। यह भी सच है कि घाटा लगते ही बड़े-बड़े धैर्यवान भावना में बह जाते हैं। इसीलिए बना है 2-6% का नियम। अब मंगलवार की मानसिकता…औरऔर भी

मुहूर्त बीता। अब सम्वत 2071 की पहली ट्रेडिंग। इस मौके पर हर ट्रेडर को पांच बातें गांठ बांध लेनी चाहिए। पहली, ट्रेडिंग पर कभी भावनाओं को हावी न होने दें। दूसरी, हर हाल में अपनी ट्रेडिंग पूंजी संभालें। तीसरी, घाटा लगे तो उसे सीखने/ट्रेनिंग का खर्च मानें। चौथी, चंद हफ्तों या महीनों नहीं, बल्कि कई सालों के आंकड़ों की थाह लें। पांचवीं बात, हर ट्रेडिंग सिस्टम को अपग्रेड करते रहना पड़ता है। फिलहाल, नए सप्ताह का श्रीगणेश…औरऔर भी

नाम और साख बनाने में सालों लग जाते हैं। इसलिए धंधे में नाम या ब्रांड की बड़ी अहमियत है। लेकिन निवेश करते वक्त केवल नाम के पीछे भागना नुकसानदेह हो सकता है। विजय माल्या और किंगफिशर जैसे किस्से बड़े आम हैं। इसलिए नामी कंपनियों की हकीकत समझने के बाद ही फैसला करें। नाम कभी-कभी कंपनी के संकट से निकलने का भरोसा दिलाता है तो अक्सर भ्रम भी पैदा कर देता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी