दीर्घकालिक निवेश के लिए आप ‘तथास्तु’ जैसी किसी ईमानदार सेवा पर निर्भर रह सकते हैं। हालांकि यहां भी अपनी तसल्ली के लिए कंपनी पर रिसर्च करना ज़रूरी है। लेकिन ट्रेडिंग के लिए नामी सलाहकार फर्म की भी सेवा महज एक इनपुट है। इसमें बुनियादी रिसर्च व मानसिक तैयारी आपको ही करनी पड़ती है। दुनिया में कोई भी ट्रेडर दूसरों की रिसर्च पर सफल नहीं हुआ तो आप कैसे होंगे! अब संधिकाल के इस हफ्ते का आखिरी ट्रेड…औरऔर भी

साल 2015 में ट्रेडिंग का पहला दिन; तो, कुछ बातें दिमाग में साफ-साफ बैठा लेनी चाहिए। सबसे पहले, ट्रेडिंग पूंजी को कभी इतना न उड़ने दें कि उतना वापस कमाना मुश्किल हो जाए। दूसरे, इसमें आपकी जीत पर कोई हारता और आपकी हार पर कोई जीतता है। सारा प्रायिकता का खेल है। तीसरे, यहां फायदा वही कमाता है जो आम व्यापार की तरह थोक के भाव खरीदता और रिटेल के भाव बेचता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

2014 के पहले दिन से आखिर से एक दिन पहले तक सेंसेक्स 28.86% और निफ्टी 30.89% बढ़ा है। निवेशक इस बढ़त से कमाते हैं। वहीं इसी दौरान सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव का अंतर 44.38% और निफ्टी के उतार-चढ़ाव का अंतर 45.39% रहा है। ट्रेडर इस अंतर से कमाते हैं। इस तरह गुजरा साल निवेशकों व ट्रेडरों दोनों के लिए ही अच्छा रहा। लेकिन उन्हीं के लिए जिन्होंने धैर्य, रिस्क और बुद्धि का इस्तेमाल लिया। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

जो सभी कर रहे हैं, उसे करना समझदार ट्रेडर का काम नहीं हो सकता। पहली बात, इस धंधे में झुनझुनवाला या कोई भी बड़ा संस्थागत निवेशक, कभी वो नहीं बताता जो वाकई करता है। दूसरी बात, ट्रेडर अगर वही करने लगा जो दूसरे कर रहे हैं तो कमाएगा किनकी बदौलत! दरअसल, ट्रेडर की मानसिक बुनावट ऐसी होनी चाहिए जो उसे वैसा करने को निर्देशित करे जैसा दूसरे नहीं कर रहे। अब कोशिश मंगलवार का बाज़ार पकड़ने की…औरऔर भी