सुबह-सुबह रिजर्व बैंक ने अचानक जब ब्याज दर 0.25% घटाकर 7.5% कर दी तो बाज़ार उछल पड़ा। सेंसेक्स 30,000 और निफ्टी 9100 के पार चला गया। लेकिन तभी मुनाफावसूली का ऐसा सिलसिला चला कि सेंसेक्स 0.72% और निफ्टी 0.82% गिरकर बंद हुआ। इससे एक ही बात साफ होती है कि खबरों और भावों में रिश्ता तो है, मगर सीधा नहीं। भाव खरीद और बिक्री के संतुलन से ही तय होते हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बाज़ार बंद होने के बाद डेढ़-दो घंटे और सुबह बाज़ार खुलने से पहले डेढ़-दो घंटे रिसर्च करना ज़रूरी है। हम ऐसी रिसर्च में खुद भी लगभग इतना-ही समय लगातार आपका काम थोड़ा आसान कर देते हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं कि आप कोई मेहनत न करें, बस यह कॉलम पढ़कर ट्रेडिंग से कमाई कर लें। ट्रेडिंग का अपना सिस्टम व अनुशासन आपको ही बनाना पड़ेगा। अब लगाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आप किसी चीज़ को सरल रखें, तामझाम व झांकी न जोड़ें तो लोग उसे नहीं खरीदते। बेचने के लिए पैकेजिंग बड़ी जानदार होनी चाहिए। लेकिन धन बनाने का फंडा बड़ा सीधा होना चाहिए। ट्रेडिंग में यह बात पूरी तरह लागू होती है। जो लोग टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटरों से लेकर फंडामेंटल व फिबोनाच्ची नंबरों का सहारा लेते हैं, वे प्रायः घाटा खाते हैं। वहीं सरलता आपको सफलता तक ले जाती है। अब मंगल की नब्ज़…औरऔर भी

बजट अच्छा है या बुरा, इस पर माथापच्ची करना विश्लेषकों व कंपनियों के रणनीतिकारों का काम है। ट्रेडर का काम तो जो और जैसा है, उसमें कमाने की जुगत निकालने का है, बजट की लहर पर सवारी गांठने का है। बजट से बाज़ार उठता है तो बढ़नेवाले शेयरों के साथ कमाना है। सीमित दायरे में रहे तो रिट्रेसमेंट या इम्पल्स से कमाएंगे। नीचे गिरे तो स्टॉक्स के सपोर्ट स्तर से कमाएंगे। अब बजट-बाद की ट्रेडिंग का आगाज़…औरऔर भी