बाहर से किसी को तैरते देखो तो कितना आसान लगता है! बस, दोनों हाथ-पैर एक लय में चलाते रहो, तैरते जाओगे। लेकिन दिखने में इतनी आसान-सी चीज़ सीखने में कतई आसान नहीं। महीनों की मशक्कत के बाद कोई कायदे से तैर पाता है। ट्रेडिंग की कला भी कुछ इसी तरह सीखनी पड़ती है। दिक्कत यह है कि अधिकांश लोग बिना सीखे ही बड़े-बड़े दांव लगाने लगते हैं और डूब जाते हैं। आइए, अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

गणनाएं बाज़ार से निकलती हैं। पर बाज़ार गणनाओं से नहीं चलता। अक्सर वो हमारे तमाम अनुमानों को धता बताते हुए अलग ही दिशा पकड़ लेता है। बाद में सभी उसकी वजह गिनाने लगते हैं। लेकिन किसी एक वजह का सिरा नहीं मिल पाता। इसलिए ट्रेडिंग करते वक्त हमें हमेशा कुछ न कुछ अनजाना घट जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में ही स्टॉप लॉस और पोजिशन साइज़िंग हमें बचाती हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

आम ट्रेडरों में अंधा रिस्क लेने का जुनून बढ़ता जा रहा है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2015 की तिमाही में एफ एंड ओ या डेरिवेटिव सेगमेंट में हुए कारोबार में रिटेल ट्रेडरों का हिस्सा लगभग दोगुना हो गया है। साल भर में इनका दैनिक कारोबार 55,483 करोड़ से बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इस सेगमेंट का कुल दैनिक कारोबार 2.25 लाख करोड़ रुपए के आसपास रहता है। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में घाटे से बचना मुमकिन नहीं। लेकिन घाटे को हम न्यूनतम ज़रूर रख सकते हैं। इसके लिए उबाल खाती भावनाएं नहीं, फौलादी अनुशासन चाहिए। किसी एक सौदे में 1.5-2% से ज्यादा घाटे से बचें क्योंकि यह हमारे मन-धन दोनों को तोड़ता है। वहीं, दस में से छह सौदों में 2-2% घाटा लगा, बाकी चार में 6-6% फायदा हुआ, तब भी हम कुल मिलाकर 12% मुनाफा कमा लेंगे। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी