पिछली बार हमने बात की थी ट्रेडिंग करते वक्त पद्धति और धन-प्रबंधन की। यहां पद्धति का मतलब यह है कि आप टेक्निकल एनालिसिस के किन इंडीकेटरों को मिलाकर सौदा करने का फैसला करते हैं। जैसे, एक पद्धति यह है कि जब कम समय के ईएमए की लाइन उससे ज्यादा समय के ईएमए को काटती ऊपर जा रही हो और एमएसीडी धनात्मक हो तो उस स्टॉक में लॉन्ग सौदा कर सकते हैं। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों में निवेश से हमें एक नहीं, दो फायदे मिलते हैं। दिक्कत यह है कि अमूमन हम यही सोचते हैं कि जिस भाव पर खरीदा है, उससे कुछ साल बाद हमें ज्यादा भाव मिल जाएगा, कम से कम इतना कि मुद्रास्फीति का असर मिटा देगा। लेकिन दूसरा फायदा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो हमें बतौर लाभांश मिलता है। इसलिए हमें कंपनी के लाभांश-रिकॉर्ड को भी तरजीह देनी चाहिए। आज तथास्तु में  लाभांश देनेवाली एक मजबूत कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग किन्हीं मायनों में बड़ी गूढ़ पहेली है और बहुत आसान भी। गूढ़ इसलिए कि जो इसके उस्ताद हैं, वो अपना हुनर किसी को बताते नहीं और जो नहीं जानते वो चैनलों से लेकर तमाम मीडिया में बकबक करते रहते हैं। आसान इसलिए कि ट्रेडिंग में सफलता के दो ही तरीके हैं। एक, आपके पास कोई न कोई पद्धति होनी चाहिए और दो, आपका धन-प्रबंधन चौकस होना चाहिए। इस पर कभी विस्तार से। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

क्या शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग सट्टा लगाने जैसा नहीं है? जब आप आंख मूंदकर मन के कहे मुताबिक दांव लगाते हैं तो यकीनन यह लॉटरी, जुआ या सट्टेबाज़ी से अलग नहीं। लेकिन, जब आप अवसरों की नापजोख के बाद ट्रेडिंग करते हो तो यह कतई सट्टेबाज़ी नहीं है। ट्रेडिंग में आप किस्मत से नहीं खेलते, बल्कि रिस्क लेते हो, जोखिम उठाते हो जिसका नफा-नुकसान आप पाते हो। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ब्रोकर, सब-ब्रोकर या जॉबर ट्रेडिंग करते हैं क्योंकि यही उनका पेशा है। बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के ट्रेजरी विभाग के लोग ट्रेडिंग करते हैं क्योंकि यही उनकी नौकरी है। लेकिन जब सामान्य नौकरी करनेवाले ट्रेडिंग के फेर में पड़ते हैं तो अक्सर डूब जाते हैं। असल में नौकरी की हर महीने बंधी तनख्वाह की मानसिकता से ट्रेडिंग नहीं की जा सकती। ट्रेडिंग में कभी जमकर कमाई तो कभी महीनों तक सूखा रहता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी