लुभावने बहकावे में न आएं तो शेयर बाज़ार से कमाना कोई रॉकेट साइंस नहीं। ट्रेडिंग भावनाओं और प्रायिकता को पकड़ने का खेल है जबकि निवेश कंपनी की संभावनाओं को पकड़ने का। जैसे, टीवीएस मोटर को ठीक चार साल पहले हमने 56.35 पर पकड़ा था। अभी चार गुना होकर 235.65 पर है। दिक्कत यह है कि यहां कुछ लोग दूसरों को चरका पढ़ाने का धंधा करते हैं। खैर, सेबी उनकी धरपकड़ में लगी है। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

भावों ने जो चाल पकड़ रखी है, वो ज़रूरी नहीं कि आगे भी जारी रहे। यही टेक्निकल एनालिसिस की सीमा है। किस भाव पर कोई शेयर ट्रेड हुआ, यह महत्वपूर्ण है। लेकिन किस भाव पर ट्रेड नहीं हो सका या हुआ भी तो बहुत थोड़े समय, यह देखना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम संस्थाओं की डिमांड व सप्लाई के असंतुलन को समझकर इन्हीं नाजुक भावों को पकड़ने की कोशिश करते हैं। अब परखते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आदर्श बाज़ार के बारे में मान्यता है कि वहां सारी सूचनाएं सबको समान रूप से समान समय पर उपलब्ध होती हैं और वो एकदम दक्षता से सही मूल्य खोज निकालता है। लेकिन आदर्श और व्यवहार का फर्क जीवन की अमिट सच्चाई है। 24 नहीं, 22 या उससे कम कैरेट के सोने से ही गहना बनता है। सूचनाओं, खबरों तक पहुंच के इसी अभाव को हम टेक्निकल एनालिसिस जैसे तरीकों से भरते हैं। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में भाव हमेशा बराबरी पर छूटते हैं। बेचने और खरीदने वालों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। लेकिन किसी भाव पर जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं, तभी जाकर सौदा संपन्न होता है। मगर, भाव/बाज़ार की दशा इससे तय होती है कि वहां बेचने की व्यग्रता ज्यादा है या खरीदने की। अभी तो जो हाल है, उसमें अधिकांश लोग फटाफट मुनाफा कमाकर निकल लेना चाहते हैं। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी