ट्रेडरों का रिस्क प्रोफाइल भिन्न होता है तो उनकी ट्रेडिंग रणनीति भी अलग होती है। जो लोग कम रिस्क लेना चाहते हैं उन्हें तिमाही नतीजों की घोषणा के आसपास कंपनी के शेयरों को हाथ नहीं लगाना चाहिए। नतीजों के 15-20 दिन बाद जब मारकाट मिट जाए, मामला शांत हो जाए, तभी उसकी तरफ झांकना चाहिए। वैसे, कुछ भी कर लो ट्रेडिंग से रिस्क खत्म नहीं हो सकता। इसलिए हिसाब से चलें। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हर खेल हर खिलाड़ी के लिए नहीं होता। वहीं, हर बॉल पीटने के चक्कर में बल्लेबाज़ खुद पिट जाता है। लंबी पारी खेलने में माहिर धुरंधर बहुत-सी गेंदों को जाने देते हैं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में भी अगर आपको लंबी पारी खेलनी है, बराबर कमाना है तो बहुत सारे अवसरों पर आपको ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। मसलन, आज डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी के दिन बाज़ार से दूर रहने में भलाई है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

दोस्तों! आज गुरुनानक जयंती के अवसर पर बाज़ार बंद है तो सोचा, क्यों न ट्रेडिंग के चिंतन व कर्म से जुड़ी कुछ मूलभूत बातों को दोहरा लिया जाए। वैसे, आपने गौर किया होगा कि हर सप्ताह इस कॉलम के लेखों का पहला पैरा एक ही थीम को आगे बढ़ाता है। इसे पढ़ने के लिए किसी सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत नहीं। हमारा लक्ष्य है कि वित्तीय बाज़ार में दिलचस्पी रखनेवाले सामान्य पाठक भी ट्रेडिंग की मूल बातों से परिचितऔरऔर भी

आईआईटी या आईआईएम से निकलने वाले बहुत से विद्यार्थी धनार्थी बनने के चक्कर में स्टार्ट-अप की तरफ भाग रहे हैं। लेकिन सही मायनों में वे उद्यमी नहीं है क्योंकि उद्यमी वो शख्स होता है जो सुरक्षा की परवाह किए बगैर नए धंधे में उतर जाता है। जो बच्चे आईआईटी या आईआईएम में जाते हैं वे तो परम सुरक्षा की खातिर ये डिग्रियां पाने जाते हैं। महज धन के पीछे भागनेवाला उद्यमी नहीं होता। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

आजकल लोगों को नौकरी कम जमती है। स्टार्ट-अप बन चुके हैं और बनते ही जा रहे हैं। उद्यमियों की भी भरमार है। सभी आर्थिक आज़ादी चाहते हैं। वित्तीय बाज़ार में भी लोगबाग यही आज़ादी हासिल करने के लिए आते हैं। सभी रिस्क लेते हैं। लेकिन स्टार्ट-अप, उद्यमी, निवेशक या ट्रेडर के रिस्क लेने का स्तर भिन्न होता है। उद्यमी रिस्क ही रिस्क लेता है, जबकि ट्रेडर हिसाब से रिस्क लेता है। अब पकड़ते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी