सिस्टम आपका, दूसरा बस मदद भर
कैलिफोर्निया के एक प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। बड़े बैंकों व संस्थाओं में रह चुके हैं। बड़ी ईमानदारी से डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की सलाह देते हैं। हाल ही उन्होंने निफ्टी ऑप्शंस में अल्गो-आधारित ट्रेडिंग सेवा शुरू की है। साल का सब्सक्रिप्शन एक लाख रुपए। हाल के उनके वेबिनार में सवाल उठे कि उनकी पुरानी सलाहें लगातार पिट क्यों रही हैं? सबक यह कि ट्रेडिंग में कोई भी अकाट्य नहीं; दूसरा मदद भर कर सकता है। अब शुक्र का अभ्सास…औरऔर भी
अभिमन्यु नहीं, बनना पड़े अर्जुन यहां
ट्रेडिंग में दिक्कत यह है कि इसमें बड़ी पूंजी चाहिए। कम से कम 50,000 रुपए महीने। फ्यूचर्स व ऑप्शंस में ट्रेड करना है तो उसमें सौदे का न्यूनतम आकार अब पांच लाख रुपए हो गया है। ऐसे में समझिए कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। इसलिए ट्रेडिंग उन्हें ही करनी चाहिए जिन्होंने बड़े अभ्यास व जतन से खुद अपना सिस्टम विकसित कर लिया हो। यहां भी महारथी तक अभिमन्यु को नहीं बचा पाते। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
पांच प्रतिशत ही धन लगाएं ट्रेंडिंग में
ट्रेडिंग अगर जम जाए तो महीने में ही 10-15% कमाया जा सकता है। लेकिन ज्यादा रिटर्न अपने साथ ज्यादा रिस्क भी लाता है। ट्रेडिंग में रिस्क रहता है कि आपकी सारी पूंजी ही डूब जाए। इसके बावजूद कोई सामान्य निवेशक बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग दोनों का फायदा उठाना चाहता है तो बेहतर यही होगा कि वो अपने धन का 95% निवेश के लिए रखे और केवल 5% ट्रेडिंग में लगाए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
निवेश में रिस्क कम तो रिटर्न भी कम
हर दिन 1500 से ज्यादा कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग। इनमें से 200 से ज्यादा के डेरिवेटिव्स के सौदे। ऊपर से निफ्टी के फ्यूचर्स व ऑप्शंस सौदे। बड़ा आसान लगता है कि इनमें से दो-चार को पकड़कर ट्रेडिंग करना। लेकिन आम नौकरीपेशा या बिजनेस करनेवाले के लिए यहां से कमाना कतई आसान नहीं। निवेश में रिस्क कम है तो रिटर्न भी कम है। साल में 15-25% मिल जाए तो पर्याप्त माना जाना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी






