आज की ग्लोबल दुनिया में भारत जैसे बाज़ार अमेरिका, यूरोप, जापान व चीन के हालात से खूब प्रभावित होते हैं। फेडरल रिजर्व ने तय किया कि ब्याज दरों को सामान्य स्तर पर लाने में हड़बड़ी नहीं बतरेगा तो डाउ जोन्स सूचकांक दो दिन में 1.6% उछल गया जबकि अमेरिकी कंपनियों का लाभ तीन तिमाहियों से घट रहा है और औसत अमेरिकी परिवार की आय दस साल पहले से भी कम है। अब नज़र सोमवार के व्योम पर…औरऔर भी

पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं। लेकिन अच्छी कंपनियों को निखरने में चार-पांच साल लग जाते हैं। मगर, बाज़ार की नज़र में चढ़ते ही तमाम लोग उन्हें पकड़ने लगते हैं और उनके शेयर उठने लगते हैं। स्मॉल-कैप कंपनियों के साथ यही होता है। अंतर्निहित ताकत उन्हें बड़ा बनाती जाती है। धीरे-धीरे एक दिन वे साधारण निवेशक की पहुंच से दूर चली जाती हैं। तथास्तु में आज एक कंपनी जो फिलहाल निखरने के मुहाने पर है।औरऔर भी

प्रक्रिया अपनाते हैं तो आपका भरोसा नहीं टूटता। धीरे-धीरे धारणा बनती जाती है कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी एक बिजनेस है जिसमें आप कुछ महीने खूब कमाते हैं तो कुछ महीने ठन-ठन गोपाल रहते हैं। कसौटी यह होनी चाहिए कि आपकी अपनाई प्रक्रिया लंबे समय में लाभप्रद है या नहीं। ट्रेडिंग में लंबा समय साल भर का होता है। इस दौरान आपको हमेशा अपनी मूल ट्रेडिंग पूंजी को सलामत रखकर चलना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

आप सिक्का उछाल कर ट्रेड करें, तब भी कई बार सफल हो सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ संयोग का खेल है जिसे रणनीति का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। इसीलिए ठोस प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया सबके लिए अलग हो सकती है। लेकिन दुनिया के सभी सफल ट्रेडर हमेशा कोई न कोई प्रक्रिया चुनकर उसका पालन करते हैं। आपके हर ट्रेड के पीछे तर्क होना चाहिए ताकि उसे उन्नत बनाया जा सके। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

सफल रणनीति का कोई बना-बनाया पैटर्न नहीं होता। दस में से छह में सफलता महज़ एक औसत है। कई बार दस में से नौ ट्रेड निशाने पर लगते हैं। कई बार दस में आठ ट्रेड घाटा लगाते है। ट्रेडिंग की सफल रणनीति के दो अहम पहलू हैं। पहली बात, उसका दीर्घकालिक प्रदर्शन अच्छा होना चाहिए। दूसरी बात, उसमें अपनाई गई प्रक्रिया सुपरिभाषित और मजबूत होनी चाहिए। उसमें तीर या तुक्के की गुंजाइश नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी