शेयर बाजार से कमाना अस्थिर मन के लोगों के वश की बात नहीं। इसके लिए साधक जैसा शांत मन चाहिए। जिस तरह पहले साधकों का ध्यान भंग करने के लिए रम्भा व मेनका जैसी अप्सराएं भेजी जाती थीं, उसी तरह इस समय निवेशकों को ध्यान भंग करने के लिए राकेश झुनझुनवाला जैसे नाम उछाले जाते हैं। ऐसे नामों की बेवसाइटों से निवेशकों को छला जाता है। इनके झांसे में ना आएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लोग-बाग बढ़ने के साथ-साथ गिरने पर भी कमाते हैं। लेकिन गिरने पर कमाने के लिए बड़ी पूंजी और रिस्क लेने का बड़ा माद्दा चाहिए। ऐसे सौदे डेरिवेटिव (एफ एंड ओ) सेगमेंट में ही हो सकते हैं, जहां न्यूनतम लॉट पांच लाख रुपए का है। मार्जिन में भले इसकी 5-10% रकम लगे, लेकिन एक लॉट में ही आप पांच लाख रुपए डुबाने का रिस्क उठाते हो। क्या इतना माद्दा है आपका? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बारिश के मौसम में हर तरफ हरी-हरी घास उग आती है तो लालच में पड़कर कुछ गाय-भैंस दसियों जगह मुंह मारती फिरती हैं। लेकिन यह पशु-व्यवहार शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में लगे इंसानों को शोभा नहीं देता। बहुत हुआ तो आप 20-25 स्टॉक छांट लें जिनमें लंबा, मध्यम व छोटा ट्रेन्ड बढ़ने का चल रहा हो। धैर्य से उन पर नज़र रखें और रिट्रेसमेंट पर खरीदें, चढ़ने पर बेचकर मुनाफा कमा लें। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

उम्मीद से बेहतर नतीजों के बावजूद कोई शेयर गिर जाए तो समझ लेना चाहिए कि जिन्होंने पहले इसे खरीदा था, वे बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं। गिरने का सिलसिला थम जाए, स्टॉक थोड़ा दम भर ले तो उसे खरीद लेना चाहिए क्योंकि ताज़ा खरीद के बल पर वो कुछ दिन में पहले जितना या उससे ऊपर के भाव तक जा सकता है। नतीजों के दौरान यह तरीका काफी लाभदायक साबित होता है। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

एक बात हमेशा गांठ बांधकर चलनी चाहिए कि बाज़ार में हम से ज्यादा मजबूत हज़ारों खिलाड़ी हैं। कौन क्या सोच पकड़ेगा, हमें नहीं पता। हमने जितने कारक गिने हैं, उसके अलावा बहुत से कारक हो सकते हैं जिन पर हमारा ध्यान न गया हो। इतने अनजान पहलुओं के बीच हमारे अतिविश्वास का कोई फायदा नहीं। इसलिए हर सौदे में गिनकर चलना चाहिए कि दांव उल्टा पड़ जाए तो मार को न्यूनतम कैसे रखेंगे। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी