बाज़ार में गुस्सा खुद के लिए घातक
बाज़ार का हम कुछ बिगाड़ नहीं सकते। लेकिन कोई स्टॉक हमारे माफिक नहीं चलता तो गुस्से में भरकर उसे खरीद या बेच डालते हैं। मेरे गांव के विश्राम सिंह तहसील जा रहे थे मुकदमा लड़ने। साइकिल की चेन बार-बार उतर जा रही थी तो लेट होता जा रहा था। तहसील के पास पुलिया की चढ़ाई पर फिर चेन उतर गई तो मार-लाठी, मार-लाठी साइकिल को ही धुन डाला। मुकदमे की तारीख छूट गई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
उठना-गिरना और गिरकर संभलना
जो शेयर उठकर गिरता है, वो कहां तक गिरेगा, कोई भरोसा नहीं। लेकिन जो गिरकर उठता है, उसके बारे में इतना माना जा सकता है कि वो पिछले उच्चतम स्तर तक चला जाएगा। हम तथास्तु में आज जिस कंपनी के बारे में लिखने जा रहे हैं, वो सरकारी और सुरक्षित कंपनी है। उसके बारे में हमने निवेश की पहली सलाह करीब सवा साल पहले दी थी। लेकिन तब से वो काफी गिरने के बाद उठान पर है…औरऔर भी
उधार के धन से कतई न करें ट्रेडिंग
कभी भी उधार के धन से ट्रेडिंग न करें। इसी नियम का हिस्सा है कि ब्रोकर कितना भी उकसाए, मार्जिन ट्रेडिंग कतई न करें। इससे आप दोहरे दबाव में आ जाते हैं। एक तो बाज़ार की अनिश्चितता। दूसरे, कर्ज़ पर ब्याज और समय पर अदायगी। ऐसे दबाव में 99.99% आशंका इस बात की है कि आप ट्रेडिंग का फैसला शांत व संतुलित दिमाग से नहीं ले पाएंगे तो पक्का पिट जाएंगे। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
गलतियों का हिसाब-किताब व सीख
हमारी सबसे बड़ी गलती यह है कि दूसरों की छोड़िए, हम अपनी गलतियों तक से नहीं सीखते। हां, पछताने की भयंकर आदत हमने ज़रूर डाल रखी है। काश! मन में आई बात पर ट्रेड करते तो इस स्टॉक के 10% उछलने का फायदा मिल गया होता। काश! स्टॉप-लॉस पकड़कर चलता तो दो लाख रुपए डूबने से बच जाते। बंधुवर, असल दिक्कत यह है कि आपको रिस्क लेने और संभालने का सलीका नहीं आता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी






