हर कोई फटाफट नोट बनाना चाहता है। इसलिए बहुतेरे लोग अधीर होकर शेयर बाजार की तरफ दौड़ते हैं। ट्रेडिंग से जमकर कमाना चाहते हैं। लेकिन वे भूल जाते हैं कि ट्रेडिंग हर किसी के लिए नहीं है। इसके लिए शांत मन, साफ समझ और तगड़े अनुशासन की ज़रूरत होती है। अस्थिर मन, सुनी-सुनाई बातों या टिप्स के भीगे भागने और झटके में फैसले लेनेवाले यहां लंबे समय तक नहीं टिक पाते। अब गहते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

अतीत व वर्तमान के सारे तथ्य जुटा लेने के बावजूद हम अक्सर फैसला नहीं कर पाते क्योंकि भविष्य में क्या होगा, नहीं जानते। जो हुआ नहीं है, उसका पता लगाया भी कैसे जा सकता है! फिर धंधे का प्रबंधन किसी और के हाथों में हो, तब भविष्य आंकने में ज्यादा ही अनिश्चितता है। यही है शेयरों में निवेश का रिस्क। हां, हमें अपने तथ्य व तर्क जरूर सही रखने पड़ते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार हमसे स्वतंत्र है। वो हमारे पहले था और बाद में भी रहेगा। उसकी चाल और स्वरूप के विकसित होने का अपना ढर्रा है। हमें उसके साथ लयताल बैठानी है। तभी हम वहां से कमा सकते हैं। इसके लिए ज़रूरी है कि हम तारीख के हिसाब से पूरा रजिस्टर बनाएं कि कोई ट्रेड चुना तो क्यों चुना और उससे कब व क्यों निकले। अपने ही अनुभव की रौशनी में खुद सीखते जाना है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग में एक और मनोविज्ञान बड़ा आम है। दांव अच्छा चल जाए तो अपना बखान और गलत पड़ जाए तो बाज़ार का दोष। गिनाने लगते हैं कि ऑपरेटर लोग बाज़ार में घुसे हुए हैं और बाज़ार को जहां जाना चाहिए, वहां से उलटी दिशा में ले जाते हैं। कहावत है कि नाच न आवै, आंगन टेढ़ा। बाज़ार में ऑपरेटर, समझदार निवेशक और भांति-भांति के लोग सक्रिय हैं। इन्हीं से बनता है बाज़ार है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी