भारतीय अर्थव्यवस्था के दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने का दावा किया जा रहा है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि उद्योग का बढ़ना थम-सा गया है। अगस्त में उद्योगों को बैंकों से मिला ऋण बढ़ने के बजाय 0.2% घट गया है। ऐसा दस सालों में पहली बार हुआ है। कंपनियों का धंधा ठहरा हुआ है। मगर शेयर बाज़ार चढ़ा हुआ है। ऐसे में निवेशयोग्य कंपनियां चुनना बड़ी चुनौती है। लेकिन तथास्तु में एक और अच्छी कंपनी…औरऔर भी

स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हर कंपनी के शेयर का अलग बीटा होता है। बीटा सांख्यिकीय गणनाओं से निकाली गई एक संख्या है जिस तक पहुंचने में स्टैंडर्ड डेविएशन व वेरियंस का इस्तेमाल किया जाता है। बीटा बताता है कि कोई स्टॉक पूरे बाज़ार यानी मुख्य सूचकांक के साथ कितनी लय में चलता है। अगर यह एक है तो बाज़ार के एकदम साथ। इससे कम या ज्यादा होना उसकी सापेक्ष चंचलता को दिखाता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

एनएसई या बीएसई की वेबसाइट भावों के अलावा तमाम ऐसी सूचनाएं देती हैं जिनसे सच तक पहुंचने में मदद मिलती है। इसी तरह की एक सूचना है वैल्यू ऐट रिस्क या वार। कैश सेगमेंट के हर स्टॉक के बारे में बीएसई व एनएसई सांख्यिकी गणनाओं के आधार पर ‘वार’ से जुड़ी चार दरें देते हैं। इन्हें समझ लिया जाए तो अंदाज़ लग सकता है कि वो शेयर गिरा तो कितना गिर सकता है। अब गुरुवार का दशा-दिशा…औरऔर भी

मंगलवार को दशहरा। बुधवार मोहर्रम। दोनों में छिपा हुआ संदेश है असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की जीत। सत्यमेव जयते। आदर्श बाज़ार में भी अंततः सच ही जीतता है। लेकिन दिमाग पर धारणाओं की पट्टी बंधी हो तो सच सामने होते हुए भी नहीं दिखता। सच कहीं अकेले हीरे या मणि की तरह चमकता हुआ नहीं दिखता। वो सूचनाओं के मंथन, उनके मेल से निकलता है। सच सूचनाओं का सार है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी