हाथी को महावत ही संभाल पाता है। आम इंसान पास फटक जाए तो हाथी शायद उसे रौंद डाले। शेयरों की ट्रेडिंग में मुंह उठाकर कूद पड़े रिटेल ट्रेडरों का यही हाल होता है। कहावत बन जाती है कि यहां तो 95% लोग कमा ही नहीं सकते। लेकिन प्रोफेशनल ट्रेडर इसी बाज़ार से कमाते हैं। घर-परिवार चलाने के साथ ही भरपूर मजे करते हैं। मन करने पर देश-विदेश की सैर करने निकल पड़ते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इंसानी फितरत और विकास का सार यही है कि वो बदतर से बदतर सूरत का भी सकारात्मक पक्ष निकाल लेता है। नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था में आधे से ज्यादा योगदान करनेवाले छोटे उद्योगों पर बुरी मार पड़ी है। सेंसेक्स 18 दिन में 6.64% झटक गया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे बहुतेरे मजबूत शेयर नीचे आ गए हैं। हालांकि, वे थोड़ा और गिर जाते तो अच्छा होता। तथास्तु में ऐसी ही एक मजबूत कंपनी…औरऔर भी

हम अपनी सोच सही कर लें तो शेयर बाज़ार हमें कभी निराश नहीं करेगा। यहां न ट्रेडिंग और न ही लंबे निवेश में अधीरता चलती है। सीधी-सी बात है कि भयंकर डर व दुविधा की स्थिति में बाज़ार से दूर रहना चाहिए। चार दिन में बाज़ार खत्म नहीं होने जा रहा। वो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता जाएगा। याद रखें, बाज़ार तभी मूर्खों की तरह बर्ताव करने लगता है जब लोग मूर्खता में सौदे करते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर बड़े अधीर होते हैं। वे चंद सूचनाओं को जोड़कर फटाफट निर्णय ले लेते हैं, जबकि प्रोफेशनल सारे डेटा पर काफी सोच-समझ और सारी प्रायिकताओं की गणना करने के बाद फैसला लेते हैं। बाज़ार अनिश्चितता से घिरा हो तो वे बाज़ार से दूर रहते हैं। वे किसी पिनक, आदत या झटके के लिए नहीं, नोट कमाने के लिए ट्रेडिंग करते हैं। वहीं, रिटेल ट्रेडरों पर अक्सर ट्रेडिंग का नशा सवार रहता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी