खबरों की बमबारी में धुआं हुआ सच
सुबह से शाम ही नहीं, देर रात तक खबरों की बमबारी। पहले मामला अखबार तक सीमित था। अब चौबीस घंटों के न्यूज़ चैनल हमेशा ब्रेकिंग न्यूज़ परोसते रहते हैं। उनका मकसद हमें खबर देना नहीं, बल्कि हमारा ध्यान खींचना होता है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में उनके कार्यक्रम देखें, उनकी टीआरपी बढ़े और उन्हें ज्यादा व महंगे विज्ञापन मिलें। हमें पता भी नहीं चलता कि सच क्या है और झूठ क्या। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
अच्छे की धारणा, बुरे से निजात
शेयर बाज़ार जब चढ़ रहा होता है तब आम निवेशक अक्सर अच्छे स्टॉक्स को बेचकर फायदा कमा लेते हैं, जबकि बुरे स्टॉक्स से चिपके रहते हैं, इस उम्मीद में कि तेज़ी की गंगा में वो भी कुछ फायदा दिला देंगे। लेकिन सही सोच है अच्छे व अच्छाई को धारण करो, बुरे व बुराई से निजात पाओ। हमें निवेश करते वक्त बुरे धन, बुरी एकाउंटिंग और बुरे बिजनेस से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
बाज़ार बना देता हमारे अहं को शून्य
बाज़ार में जब हम गलत साबित होते हैं तो इससे हमारा कुछ घटता नहीं। भले ही स्टॉप-लॉस थोड़ा घाटा लगा दे। लेकिन सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हमारा अहं पहले से छोटा पड़ जाता है। यह अहं छोटा पड़ते-पड़ते जिस दिन एकदम खत्म हो जाता है, शून्य हो जाता है, उसी दिन से वित्तीय बाज़ार में हमारी कमाई की राह खुलती है। अहं घर पर चलता है, बाज़ार में कतई नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
यहां जीतता वही, जो मान ले गलती
बाज़ार की संभवतः सबसे बड़ी सीख है विनम्रता। वह हमें आईना दिखाता है। यह भी सिखाता है कि हम दूसरों की आंख में आंख डालकर कह सकें कि हां, मैं गलत था। यहां अपनी गलती माननेवाले जीतते हैं। वहीं, जो अहंकारवश जिद पकड़े रहते हैं, बाज़ार उनकी सारी हेंकड़ी भुला लेता है। जो बुद्धिजीवी बाज़ार के बजाय सत्ता की ताकत पर भरोसा करते हैं, वे इतिहास के कूड़ेदान में जाने को अभिशप्त हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






