फालतू सवाल कि निफ्टी कहां जाएगा
अगर आपका दिमाग बराबर इसी कयासबाज़ी के इर्दगिर्द घूमता रहता है कि बाज़ार कहां जाएगा तो अभी तक आप ट्रेडिंग करने के काबिल नहीं बने हैं। बाहर से तमाशा देखने और मौज करनेवालों के लिए यह बड़ा मजेदार सवाल है। वे हर किसी से पूछते रहते हैं कि निफ्टी कहां जाएगा। कोई पूछे तो कह दीजिए कि निफ्टी 9500 तक गिर सकता है। वैसे भी जीडीपी पहली तिमाही में मात्र 5.7% बढ़ा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
दिन है बड़े भूचाल और बड़ी खबर का
आज अर्थजगत और शेयर बाज़ार के लिए बड़ी खबरों का दिन है। महीने का आखिरी गुरुवार होने के नाते अगस्त के डेरिवेटिव सौदों की एक्पायरी का दिन है। दूसरे, आज बाज़ार बंद होने के बाद शाम को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर के आंकड़े आएंगे। यह आंकड़े काफी अहम हैं क्योंकि मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था मात्र 6.1% बढ़ी थी। कहीं हालत और ज्यादा खराब न हो जाए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
करना पड़े अपने विश्लेषण पर भरोसा
मुंबई बारिश से सराबोर है। लेकिन बाज़ार का शोर बदस्तूर जारी है। इस शोर में सच तक पहुंचना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा काम है। ऐसे में हमें सरकार या कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट की थाह लेनी पड़ती है। साथ ही चूंकि सच पका-पकाया नहीं मिलता, इसलिए हमें विश्लेषण का सहारा लेना पड़ता है। दूसरे के विश्लेषण में पक्षधरता होती है, इसलिए हमें विश्लेषण की अपनी क्षमता विकसित करनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
मीडिया बना भोपूं, वेब से थोड़ी आस
किसी सार्थक फैसले के लिए सच जानना बहुत ज़रूरी है। लेकिन सच तक पहुंचने के लिए सही सूचनाओं या खबरों का मिलना आवश्यक है। मुश्किल यह है कि जब मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा हो, आम अखबार व न्यूज़ चैनल राजनीतिक दलों और बिजनेस अखबार व चैनल कंपनियों के भोंपू बन गए हों, तब सच्चाई तक कैसे पहुंचा जाए। शुक्र है कि वेब मीडिया का एक हिस्सा अभी निष्पक्ष बना हुआ है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी






