पलायन है औरों को ज़िम्मेदार बताना
अगर ट्रेडिंग या जीवन के किसी भी क्षेत्र में आप अपने फैसलों व काम के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं तो यह एक तरह का पलायनवाद है। नियम-अनुशासन तोड़ने और खुद निर्धारित फ्रेमवर्क का पालन नहीं करने पर कामयाबी आपके हाथ से बाहर निकल जाएगी। ट्रेडिंग में यही चीजें तो आपको औरों से भिन्न करती और जीत दिलाती हैं। बाकी तो प्रायिकता का खेल है जो सबके लिए एकसमान काम करता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
हर सौदे के लिए हम खुद ज़िम्मेदार
सर्वमान्य सच है कि हम शेयर बाज़ार में जो भी सौदे करते हैं, उसके लिए आखिरकार खुद ही ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन यहां तो हर कोई सफलता का श्रेय खुद लेता है, जबकि नाकामी के लिए अपने अलावा हर किसी को दोषी ठहरा देता है। इंटरनेट सुस्त था, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सही नहीं था, बीवी-बच्चों या कुत्ते ने परेशान कर रखा था, सलाह देनेवाला गलत निकला। दरअसल, लोगबाग गलत साबित होने से डरते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
कहां मिले सही वित्तीय सलाहकार!
जिस तरह खुद दवा लेना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, उसी तरह मनमर्जी से निवेश करना वित्तीय सेहत के लिए घातक हो सकता है। लेकिन आज डॉक्टर तो हर बाज़ार व मोहल्ले में मिल जाएंगे, जबकि वित्तीय सलाहकार नहीं मिलते। बहुत हुआ तो बीमा एजेंट मिलते हैं जिनका मुख्य मकसद कमीशन कमाना है। ऐसे में आम निवेशक को मजबूरन खुद अपना वित्तीय सलाहकार बनना पड़ता है। बड़ी कठिन चुनौती है यह। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
पकड़ें कैसे शेयरों में मांग-सप्लाई को
शेयर बाज़ार को सामान्य बाज़ार की तरह मांग और सप्लाई पर चलनेवाला बाज़ार मान लें तो हमारी समस्या काफी सुलझ जाती है। लेकिन शेयर बाज़ार में मांग और सप्लाई को सही तरीके से कैसे पकड़ा जाए? जवाब है कि रोज़ाना या साप्ताहिक भावों के चार्ट पर उंगली सबसे ताज़ा भाव पर रखें और पीछे वहां तक ले जाएं, जहां से भाव गिरे या उठे थे। उठे थे मांग और गिरे थे सप्लाई पर। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी







