वित्तीय बाजार में ट्रेडिंग की त्रिपक्षीय चुनौती का मुकाबला करना कठिन है। पर मुश्किल नहीं। इसे आत्म अनुशासन के सात कदमों से हम नाप सकते हैं। पहला कदम। आप साफ समझ लें कि ट्रेडिंग करने के पीछे आपका सामाजिक या पारिवारिक मकसद क्या है। अगर केवल अपने लिए ट्रेडिंग करना चाहते हैं, तब मामला संगीन है क्योंकि ऐसी सूरत में आप कभी भी ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करने के लती बन सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

गिरते हैं शह-सवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले। जीवन में वही सफल होते हैं जो चुनौतियां लेते हैं। जिन बूड़ा तिन पाइयां गहरे पानी पैठि। मैं बपुरा बूड़न डरा, रहा किनारे बैठि। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक साथ हमें तीन मोर्चों पर चुनौती देती है। आर्थिक के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक स्तर पर। इसलिए इसे अपनाते वक्त बेहद सावधानी, लगन व मेहनत ज़रूरी है। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार को लेकर बहुतों को लगता है कि यहां हर महीने आराम से 15-20% रिटर्न कमाया जा सकता है। कुछ तो ऐसा स्टॉक पूछते हैं जिसमें दो-तीन महीने में धन कई गुना हो जाए। इस लालच का फायदा उठाकर ठग उनकी सारी जमापूंजी साफ कर जाते हैं। जब अच्छे से अच्छे बिजनेस में सालाना रिटर्न 20-25% से ज्यादा नहीं होता तो कोई शेयर इसे कैसे मात कर सकता है? अब तथास्तु में आज एक बड़ी कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता पानी है तो अपने फैसलों की नियमित समीक्षा करनी पड़ेगी। खासकर उन सौदों की जिनमें तगड़ी चोट लगी है। स्टॉप लॉस को चोट मानना मूलतः गलत सोच है। वह तो वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग करने के बिजनेस की लागत है जिससे बचना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं। बाकी सौदों में देखना पड़ेगा कि आपने अनुशासन व ट्रेडिंग सिस्टम को कहां तोड़ा है। सिस्टम बनाए बिना ट्रेड करना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाहरी परिस्थितियों पर हमारा वश नहीं। लेकिन उन पर हमारी प्रतिक्रिया हमारे वश में है। बाढ़ सबको बहा ले जाती है। मगर कुशल तैराक उससे बच निकलते हैं। बांध टूट जाए तो पानी गांव के गांव तबाह कर देता है। लेकिन उसी पानी से बिजली भी बनाई जाती है। जो हालात का माकूल इस्तेमाल करते हैं, वे ही आखिरकार जीतते हैं। जीवन का यह सामान्य नियम वित्तीय ट्रेडिंग पर भी लागू होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी