केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय से लेकर कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय की तरफ से शेल कंपनियों से जुड़ी जैसी जानकारियां सामने लाई जा रही हैं, उससे कालेधन को सफेद करने के मामले में उनकी भूमिका को लेकर उठा रहस्य गहराता जा रहा है। कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय ने इसी रविवार को बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है है कि मंत्रालय के व्‍यापक अभियान के आधार पर दो साल या उससे भी अधिक समय तक निष्क्रिय रहने के कारणऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेश का रिस्क कभी मिटता नहीं। यह कभी एक सीमा से ज्यादा घट नहीं सकता। कभी-कभी तो यह ज्यादा ही बढ़ा होता है। मसलन, फिलहाल निफ्टी-50 सूचकांक 26.87 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इससे पहले 14 जनवरी 2008 को वो 27.89 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हुआ है। ज़ाहिर है कि बाज़ार के गिरने का रिस्क अभी बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। ऐसे में तथास्तु में सावधानी से चुनी गई कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार की तरह जीवन में भी अनिश्चितता कोई कम नहीं। पिछले गुरुवार (26 अक्टूबर) को 101 डिग्री तक बुखार चढ़ा तो लगा कि क्रोसीन वगैरह लेकर मामला ठीक हो जाएगा। लेकिन अगले दिन वो और चढ़ गया। 102 बुखार में किसी तरह शुक्रवार का कॉलम लिखा। दोपहर होते-होते बुखार 103 के पार चला गया। हालत इतनी खराब हो गई कि अंततः अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। कल ही रात अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर वापस आया हूं।औरऔर भी

अब तक के महानतम ट्रेडरों में बहुतेरे ऐसे हैं जो आधे से ज्यादा सौदों में घाटा उठाते रहे। लेकिन इससे उनकी कमाई पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। कारण यह कि वे घाटेवाले सौदों से जल्दी से जल्दी निकलते रहे, जबकि मुनाफेवाले सौदों में लंबे वक्त तक बने रहे। तब ट्रेडरों के पास आज जैसी चार्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। आज तो आधे से ज्यादा सौदों में मुनाफा कमाना अपेक्षाकृत आसान है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी