नए की चमक, पुराने में भी दम
अक्टूबर 2007 में चार लाख रुपए से बनाई गई कंपनी फ्लिपकार्ट का मूल्यांकन दस साल बाद 2000 करोड़ डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपए) हो जाता है, वो भी तब उसका पिछले साल उसका घाटा 68% बढ़कर 8771 करोड़ रुपए हो गया था। यह है नए बिजनेस में छिपी संभावना और उसके मूल्यांकन का एक दृष्टांत। पर, कुछ पुराने बिजनेस हैं जिनका दम हमेशा बना रहता है। आज तथास्तु में सौ साल से ज्यादा पुरानी कंपनी…और भीऔर भी
डेरिवेटिव में रतजगा कराने की तैयारी
पहली अक्टूबर से हमारे प्रतिभूति बाज़ार में बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंजों को शेयरों के साथ ही कमोडिटी डेरिवेटिव में ट्रेडिंग की इजाजत दी जा चुकी है। इसके अलावा इक्विटी डेरिवेटिव की ट्रेडिंग का समय सुबह 9 बजे से शाम 3.30 बजे से बढ़ाकर मध्यरात्रि 11.55 बजे तक कर दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि कमोडिटी डेरिवेटिव की ट्रेडिंग सुबह 10 बजे से रात 11.55 बजे तक हो रही है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
स्मार्ट निवेशक हमेशा मारते हैं बाज़ी
डाउ सिद्धांत का नया रूप यह है कि शेयर बाज़ार में मार्क-अप, डिस्ट्रीब्यूशन और मार्क-डाउन के तीन दौर होते हैं। मार्क-अप में सबसे पहले समझदार निवेशक व कंपनियों के अंदर के लोग एंट्री लेते हैं। इसके बाद बैंक, वित्तीय संस्थाएं व प्रोफेशनल ट्रेडर घुसते हैं। म्यूचुअल फंड सबसे अंत में आते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन के दौर में रिटेल ट्रेडर घुसते हैं। मार्क-डाउन में समझदार सबसे पहले और म्यूचुअल फंड सबसे बाद में निकलते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
डाउ सिद्धांत के तीन दौर हैं बड़े खास
वॉल स्ट्रीट जनरल के पहले संपादक और डाउ जोन्स एंड कंपनी के संस्थापक थे चार्ल्स एच. डाउ। करीब सौ साल पहले उनके लिखे अनेक संपादकीय के आधार पर डाउ सिद्धांत निकाला गया। इसके मुताबिक शेयर बाज़ार में तीन प्रमुख दौर चलते हैं। एकट्ठा करने का दौर, व्यापक लोगों की भागादारी का दौर और बेचकर मुनाफा कमाने या वितरण का दौर। आमतौर पर रिटेल निवेशक पहले दौर के बजाय तीसरे दौर में आते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






