शेयर बाज़ार में निवेश करनेवाले जानते हैं कि सेंसेक्स की चाल किसी टीवी चैनल के क्राइम शो से भी ज्यादा सनसनीखेज़ है। वह कुछ साल में 33,000 से 1,00,000 तक पहुंच सकता है और एकाध महीने में 25,000 तक भी लुढ़क सकता है। यही रिस्क है शेयर बाज़ार में निवेश करने का। लेकिन उठने और गिरने, दोनों ही सूरत में यहां निवेश के मौके कभी कम नहीं होते। आज तथास्तु में निवेश का ऐसा ही एक मौका…औरऔर भी

हमारी इच्छा से परे शेयरों के भावों की स्वतंत्र गति होती है। वैसे तो हर सौदा विपरीत सौदे से नत्थी होकर ही पूरा होता है। लेकिन जब खरीदने की आतुरता ज्यादा और बेचने की कम हो या ज्यादातर बेचनेवाले निकल चुके हों, तभी भाव बढ़ते हैं। इसकी उल्टी स्थिति में गिरते हैं। हमें शांतभाव से यही पकड़ना है कि किस भाव पर प्रोफेशनल निवेशकों व संस्थाओं में खरीदने की आतुरता हो सकती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का कोई इकलौता स्टाइल नहीं है। यहां लोग तरह-तरह से कमाते हैं। एक परिचित सज्जन हैं जो 25-30% सालाना कमाने का लक्ष्य केवल 3-4 शेयरों में ही ट्रेडिंग से पूरा कर लेते हैं। एक अन्य जानकार हैं जो कभी स्टॉप-लॉस नहीं लगाते। फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के चढ़ते स्टॉक खरीदते हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ गिरने पर ज्यादा खरीद लेते हैं। पर्याप्त कमा लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह ट्रेडिंग में हर तरफ मुंह मारने से कमाई नहीं होती। किसी के बताए स्टॉक की तरफ लपक लेने की आदत सही नहीं है। हमें अपनी लय-ताल से मिलनेवाले 15-20 स्टॉक्स चुन लेने चाहिए। बहुत हुआ तो दायरा 40-50 तक जा सकता है। लेकिन उसके बाहर नहीं। ट्रेडिंग में कमाई का आधार है शेयरों के भाव की छोटी-बड़ी लहरों पर नीचे से ऊपर तक कमाना। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जिस तरह हर इंसान का स्वभाव अलग होता है, उसी तरह हर स्टॉक का भी स्वभाव अलग-अलग होता है। हालांकि कुछ स्टॉक्स एकदम एक-सा बर्ताव करते हैं। पर अमूमन हरेक की बारीकियां अलग होती हैं। दरअसल, किसी स्टॉक में किस तरह के निवेशक व ट्रेडर सक्रिय हैं, उसी से उसका स्वभाव बनता है। ऐसे में सबसे अच्छी स्थिति तब होती है जब स्टॉक का स्वभाव हमारे अपने स्वभाव की लय से मिल जाए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी