शिक्षा या रोज़गार के लिए देशों की सीमाएं खत्म हो रही हैं। इस तरह ग्लोबल होती दुनिया में कम से कम शेयर बाज़ार तो ग्लोबल हो ही चुके हैं। इसलिए ट्रेडिंग के आगाज़ से पहले विश्वबाज़ार पर नज़र डाल लेना ज़रूरी है। अमेरिका के डाउ जोन्स और S&P-500 सूचकांक की स्थिति कल क्या रही? आज ऑस्ट्रेलिया व एशिया के बाज़ारों का क्या हाल है? सारा कुछ गूगल फाइनेंस पर लाइव मिल जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कुछ प्रोफेशनल ट्रेडर लंबे समय के निवेश का मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि जब खरीदा गया शेयर बढ़ने के बजाय गिरता ही जाता है तो लोग मजबूरन लंबे निवेशक बन जाते हैं। लेकिन आम ट्रेडर के लिए अच्छी रणनीति यह होगी कि वह फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के ही शेयर खरीदे। गिरे तो और ज्यादा खरीद ले। साथ ही 15-20 दिन नहीं, बल्कि पोजिशनल ट्रेड करे और मुनाफा कमाकर ही निकले। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार के साथ चलें, उसके विपरीत नहीं। बाज़ार जब जमकर गिरता है, तब भी बहुत सारे शेयर बढ़ते हैं। लेकिन जब सुबह से ही बाज़ार का गिरना साफ हो गया हो, तब क्या हमें खरीदने का सौदा करना चाहिए? नहीं, क्योंकि हम शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने आए हैं, जबरदस्ती की बहादुरी दिखाने नहीं। बाप बहादुर शेर से भिड़ गए। फिर क्या हुआ? शेर खा गया! ऐसी बहादुरी से दूर रहना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के स्टॉक्स चुनते वक्त सबसे अहम है उनके भावों का ट्रेन्ड। हमें देखना होता है कि उनका लॉन्ग टर्म (दो-तीन साल) ट्रेन्ड, मीडियम टर्म (तीन से छह महीने) ट्रेन्ड और शॉर्ट टर्म (5-20 दिन) ट्रेन्ड क्या चल रहा है। अगर तीनों ट्रेन्ड तेज़ी के हों तो सबसे अच्छा है। अन्यथा, कम से कम लॉन्ग और मीडियम टर्म तो तेज़ी के होने ही चाहिए। इनमें हम रिट्रेसमेंट ट्रेड से कमाते हैं। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कमानेवाले तेज़ी से भी कमाते हैं और मंदी से भी। मसलन, अभी गिरावट का दौर चल रहा है। गिरनेवाले शेयरों की संख्या बढ़नेवाले शेयरों के कहीं ज्यादा है। मगर, हम खरीद के ही सौदे क्यों तलाशते हैं? जवाब है न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाने का लक्ष्य। गिरावट पर शॉर्ट-सेलिंग से कमाते हैं और ऐसा डेरिवेटिव्स में ही किया जा सकता है, जहां बहुत रिस्क है और भरपूर पूंजी लगती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी