डर व लालच के साथ खेलता है बाज़ार
शेयर बाज़ार में ट्रेड/निवेश करने बहुतेरे आते हैं। मगर घाटा खाने के बाद किनारे लग जाते हैं। उनका कोई स्थाई मकसद नहीं होता। लेकिन जो लोग किसी भी वजह से सोच-विचारकर ट्रेडिंग को गंभीरता से चुनते हैं, उनके दो पक्के मकसद होते हैं; बराबर धन कमाना और कमाई कभी न गंवाना। बस, इसी के साथ वे डर व लालच की दो विकट भावनाओं में लिपट जाते हैं और बाज़ार उनसे खेलने लगता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
झांकियों के दौर में सच कहां है!
भारत फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। लेकिन प्रति व्यक्ति आय में भारत दुनिया में 126वें नंबर पर हैं। इस साल अब तक बीएसई सेंसेक्स उभरते देशों में सबसे ज्यादा 8.3% बढ़ा है, जबकि चीन का शांघाई सूचकांक 15.6% गिरा है। लेकिन इसी दौरान बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक चीन से ज्यादा 15.7% गिरा है। झांकियों के इस दौर में सच की डोर को पकड़ना ज़रूरी है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
अकेला भाव नहीं पकड़ सकता है चाल
जिस तरह सिर्फ चिनगारी या लपटों को देखकर आप आग का स्रोत नहीं पकड़ सकते। उसी तरह सिर्फ भावों को देखकर स्टॉक की चाल नहीं पकड़ी जा सकती। यकीनन, सबसे ज़रूरी है कि भावना के बजाय तर्क से काम लेना। लेकिन तर्क सभी संबंधित तथ्यों को जुटाए बिना बुद्धि-विलास बन जाता है और किसी काम का नहीं रहता। भाव बराबर तब बढ़ता है जब संस्थाएं खरीदने को आतुर होती हैं, अन्यथा गिरते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
बाज़ार से स्टॉक तक अलग है स्वभाव
दुनिया के ग्लोबल होते जाने से तमाम शेयर बाजारों की भौगोलिक सीमाएं काफी हद तक मिट गई हैं। न्यूयॉर्क से टोक्यो और लंदन से दिल्ली तक अक्सर एक-सी लहर चलती है। फिर भी हर शेयर बाज़ार का अपना विशिष्ट स्वभाव होता है। इसमें भी हर स्टॉक का अपना अलग स्वभाव होता है। स्वभाव की यह भिन्नता उस शेयर बाज़ार या स्टॉक से चिपके अलग तरह के ट्रेडरों व निवेशकों से तय होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







