बड़ी कंपनियों ने धंधा किसी तरह संभाल लिया है। पर, छोटी कंपनियों की हालत खस्ता बनी हुई है। पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में शामिल कंपनियों का औसत इक्विटी पर रिटर्न मात्र 3% रहा था। इससे पिछले दो सालों में भी यह क्रमशः 2% और 3% रहा था। 2017-18 का हाल शायद ही कोई चमत्कार दिखाए। फिर भी बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 78.25 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों का दौर चल रहा है। कल व परसों हिंदुस्तान यूनिलीवर, बॉम्बे डाइंग, एब्बट इंडिया, ल्यूपिन, पंजाब नेशनल बैंक, ब्रिटानिया, आर कॉम व सिंडीकेट बैंक के नतीजे आए तो आज से लेकर शुक्र तक हिंडाल्को, टाटा स्टील, आईटीसी, वोल्टाज़, जे के टायर, अशोक लेलैंड, बजाज ऑटो, डालमिया भारत व डेन नेटवर्क्स जैसी कई कंपनियों के नतीजे आने हैं। देखना यह है कि ये नतीजे क्या कह रहे हैं। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बीते हफ्ते केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूको बैंक और देना बैंक के नतीजों से पता चला कि इन चार सरकारी बैकों को मार्च तिमाही में 11,729 करोड़ रुपए का सम्मिलित घाटा लगा है। यही नहीं, बढ़ते एनपीए के चलते इस दौरान निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ 45% घट गया, जबकि एक्सिस बैंक को लिस्टिंग के बाद पहली बार शुद्ध घाटा हुआ, वो भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि 2188.7 करोड़ रुपए का। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाजार मूलतः देश की औद्योगिक प्रगति का आईना है। लेकिन अपने यहां संस्थाओं व अमीरतम लोगों की मोटी रकम आने से बाज़ार कमज़ोर होती औद्योगिक स्थिति के बावजूद फूलकर कुप्पा हुआ पड़ा है। ताज़ा आंकड़ा आया है कि मार्च में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की वृद्धि दर घटकर 4.4% रह गई है, जबकि उससे पहले के चार महीनों की औसत दर 7.6% रही थी। यही नहीं, देश का निर्यात भी घट गया है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

अक्टूबर 2007 में चार लाख रुपए से बनाई गई कंपनी फ्लिपकार्ट का मूल्यांकन दस साल बाद 2000 करोड़ डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपए) हो जाता है, वो भी तब उसका पिछले साल उसका घाटा 68% बढ़कर 8771 करोड़ रुपए हो गया था। यह है नए बिजनेस में छिपी संभावना और उसके मूल्यांकन का एक दृष्टांत। पर, कुछ पुराने बिजनेस हैं जिनका दम हमेशा बना रहता है। आज तथास्तु में सौ साल से ज्यादा पुरानी कंपनी…और भीऔर भी