रुपए की कमज़ोरी से समान आयात के लिए हमें ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे। भारत अपनी 83% तेल ज़रूरत आयात से पूरी करता है। लेकिन कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय दाम बढ़ते-बढ़ते 80 डॉलर/बैरल को पार कर चुका है। यह बीते चार साल का उच्चतम स्तर है। मई 2014 से जनवरी 2016 के बीच कच्चे तेल के दाम 74% लुढ़क गए थे तब प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी किस्मत कहा था। लेकिन आगे संकट है! अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

रुपया कमज़ोर पड़ता जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 68 के नीचे जा चुका है। जानकार कहते हैं कि जिस तरह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारत से डॉलर निकाल रहे हैं और रिजर्व बैंक के तमाम उपाय जिसे नहीं रोक पा रहे, उसमें रुपया जल्दी ही 70 तक पहुंच जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। इससे आईटी समेत तमाम निर्यातक कंपनियों को लाभ होगा। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह अशुभ संकेत है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

झूठ ज्यादा नहीं चलता। देर-सबेर उसका बेड़ा गरक हो जाता है। यह नियम निजी जीवन से लेकर राजनीति और बिजनेस तक पर लागू होता है। सत्यम कंप्यूटर्स को उसका झूठ ही ले डूबा। दो साल पहले निर्यात पर निर्भर एक नामी कंपनी का धंधा इसलिए मार खा गया क्योंकि अमेरिकी ग्राहकों को पता चल गया कि वो झूठ बोलती है। सत्य ही अंततः जीतता और चलता है। अब तथास्तु में सच के दम पर खड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत में शुद्ध रूप से मुनाफा कमाने आए हैं, अर्थव्यवस्था या शेयर बाज़ार को चमकाने के लिए नहीं। देश-विदेश की मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल माह में हमारे शेयर बाज़ार व बांडों से 15,561.48 करोड़ रुपए निकाले थे। उसके बाद कल 17 मई तक वे 17,897.84 करोड़ रुपए और निकाल चुके हैं। गनीमत है कि घरेलू संस्थाओं ने बाज़ार को संभाल रखा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी