डॉलर के मुकाबले रुपया इस साल जनवरी से अब तक 7.4% गिर चुका है। पिछले एक महीने में यह गिरावट कुछ ज्यादा ही बढ़ गई। उसको संभालने के लिए रिजर्व बैंक को बाज़ार में बराबर डॉलर झोंकने पड़ रहे हैं। इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घटता जा रहा है। 13 अप्रैल-2018 से 18 मई-2018 के बीच यह 11 अरब डॉलर (75,086 करोड़ रुपए घट चुका है। यह गंभीर चिंता की बात है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अगर मैं कहूं कि दस साल में बीएसई सेंसेक्स अभी के 34,924.87 अंक से बढ़ते-बढ़ते 1,00,000 पर पहुंच जाएगा तो आप कहेंगे कि लंबी फेंक रहा है। लेकिन कहूं कि सेंसेक्स की इस बढ़त में सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न की दर मात्र 11.09% बनती है तो बोलेंगे कि यह तो कोई ज्यादा नहीं। जी हां, बचत से दौलत बनाने की राह में चक्रवृद्धि दर की महिमा को समझना बहुत ज़रूरी है। अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

नवंबर 2016 में लगी नोटबंदी की मार से छोटे व मझोले उद्योग अभी तक उबर नहीं पाए हैं। फिर, जुलाई 2017 के बाद जीएसटी के खराब अमल ने निर्यातकों को निचोड़ दिया। वे सरकारी नौकरशाही को संतुष्ट नहीं पा रहे कि उन्होंने निर्यात का शिपमेंट कर दिया है तो उनका टैक्स रिफंड अटका पड़ा है। यह रकम करीब 10,000 करोड़ रुपए है और इतनी कार्यशील पूंजी छोटे निर्यातक आसानी से जुटा नहीं पाते। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

मुद्रा कमज़ोर होने पर देश का निर्यात बढ़ जाता है। लेकिन अपने यहां ऐसा नहीं हो रहा। हमारा निर्यात अप्रैल-2018 में 5.1% बढ़ा है। मगर, मार्च-2018 में खत्म वित्त वर्ष में कुल निर्यात 303 अरब डॉलर हुआ, जो साल भर पहले से ज्यादा होने के बावजूद वित्त वर्ष 2013-14 के 310 अरब डॉलर के निर्यात से कम है। ऐसा तब, जब इस दौरान विश्व अर्थव्यवस्था सुधर गई और हमारा जीडीपी भी बढ़ा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रुपए के कमज़ोर और कच्चे तेल के महंगा होते जाने से देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत नकारात्मक असर पड़ेगा। कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ता जाएगा। देश से ज्यादा डॉलर निकलेंगे। नतीजतन चालू खाते का घाटा बढ़ता जाएगा। सरकार को ज्यादा ऋण उठाना पड़ेगा तो देश का राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा। महंगाई भी बढ़ेगी तो रिजर्व बैंक किसी भी सूरत में ब्याज दर नहीं घटा पाएगा। ऊपर से साल भर बाद चुनाव हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी