ब्रेकआउट ट्रेड गलत नहीं, सही मंत्र है
बड़ी स्वाभाविक गलती हम किसी शेयर के बहुत बढ़ने पर भी करते हैं। सोचते हैं, शेयर पहले से 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर है तो कितना बढ़ेगा! भूल जाते हैं कि जब शेयर चढ़ता रहता है तो उसे खरीदने के आतुर बहुतेरे होते हैं, जबकि बेचनेवाले नगण्य। खरीदने की यही आतुरता उस शेयर को चढ़ाती जाती है। दीर्घकालिक निवेश के लिए यह तरीका घातक है। लेकिन ट्रेडिंग में ब्रेकआउट एक सही मंत्र है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
बहुत गिरा उठे तो दबा डालते हैं लोग
किसी शेयर के काफी गिरने पर हम सोचते हैं कि अब ज्यादा नहीं गिरेगा। हमारे जैसे रिटेल ट्रेडरों की खरीद पर वो बढ़ने लगे तो हम फटाफट खरीद डालते हैं। कंपनी फंडामेंटली मजबूत है तो यह समझदारी भरा निवेश हो सकता है। लेकिन ट्रेडिंग के लिए घातक है क्योंकि हर बढ़त पर ऊपरी भाव के पिछले खरीदार उसे बेचने लगते हैं तो बार-बार गिरता रहता है। मजबूरन हमें लॉन्ग-टर्म निवेशक बनना पड़ता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
टॉप या बॉटम नहीं, वाजिब रेंज पकड़ें
बड़े से बड़ा जानकार भी नहीं जानता कि किसी स्टॉक का सटीक टॉप और बॉटम कहां होगा। इसलिए यह मान लेना या अपेक्षा करना खुद को धोखे में रखने जैसा है कि हम या आप ऐसा कोई टॉप व बॉटम पकड़ लेंगे। हम अधिक से अधिक इतना कर सकते हैं कि टेक्निकल संकेतकों वगैरह का इस्तेमाल करते हुए 5-10% की ऐसी रेंज चिन्हित कर लें, जिसकी प्रायिकता ज्यादा और रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात अनुकूल हो। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
अनिश्चितता बनी रहे तो ट्रेडिंग फले
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग अनिश्चितता से दूर भागने नहीं, बल्कि उससे खेलने का बिजनेस है। यकीनन इस समय विदेश से लेकर देश तक में अनिश्चितता का आलम है। कच्चे तेल के दाम, रुपए की विनिमय दर और चालू व राजकोषीय घाटे समेत सारी अर्थव्यवस्था के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। सरकारी दावों पर यकीन करने में खतरा है क्योंकि उसके मंत्रियों का झूठ बोलना अपवाद नहीं, नियम है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी






