आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार व भावनाओं में संतुलन आने लगता है और जो जैसा है, उसे आप वैसा ही देखने लगते हैं। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

अवचेतन मन में बैठी नकारात्मक धारणाओं, विचारों और भावनाओं से समय रहते कैसे निजात पा ली जाए, यह बड़ा अहम मसला है। उनसे मुक्ति न पाई गई तो वे बड़ी घातक हो सकती हैं। इसे रोकने का पहला उपाय है कि हम अपने अंतर्मन के प्रति सचेत हो जाएं। पता लगाएं कि हमारे अंदर जाने-अनजाने क्या-क्या चलता रहता है। आंख मूंदने से यह काम नहीं होगा। हां, आनापान ध्यान इसका कारगर तरीका है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का हाल इस समय बड़ा विचित्र है। सेंसेक्स ऐतिहासिक शिखर पर है। लेकिन उसमें शामिल 30 में से 22 कंपनियों के शेयर दबे पड़े हैं। कुछ दिनों पहले स्मॉल-कैप सूचकांक 14 महीनों के न्यूनतम स्तर पर चला गया। इनमें से कुछ स्टॉक तो 90% तक गिर गए। ऐसे माहौल में अच्छी कंपनियों चुनने का रास्ता कतई सीधा-सरल नहीं हो सकता। लेकिन नज़र वालों के लिए मौके कम नहीं हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हमारे अवचेतन दिमाग में गहरे पैठी मान्यताओं व धारणाओं से हमारे सचेत विचारों की लड़ी फूटती है और इन्हीं विचारों से भय, लालच, क्रोध, चिंता व संशय जैसी भावनाएं पैदा होती हैं। जब इस तरह की भावनाएं सक्रिय हो जाती हैं तो वे हमसे ऐसे काम करवाती हैं जिनके बारे में हमने सोच रखा था कि वैसा नहीं करेंगे। ट्रेडर का सारा अनुशासन टूट जाता है और वो गलतियां करता चला जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिजर्व बैक ने दो महीने में दूसरी बार रेपो या बैंकों को दिए जानेवाले अल्पकालिक ऋण पर ब्याज 0.25% बढ़ाकर 6.50% कर दी। इसका कितना असर उद्योग से लेकर आम लोगों के ऋण के महंगा होने पर पड़ेगा, यह महज कयासबाज़ी है क्योंकि ऋण की कम मांग के बीच बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे, यह कहना मुश्किल है। शायद इसीलिए रिजर्व बैंक ने 2018-19 में जीडीपी के विकास का अनुमान 7.4% पर बनाए रखा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी