राजनीति सेवाभाव से करो तो उसमें त्याग ही त्याग है। लेकिन स्वार्थ के लिए करो तो आज हमारे देश का सबसे शानदार धंधा है। इतना जबरदस्त रिटर्न किसी बिजनेस में भी नहीं। फिर भी राजनीति को पांच साल के चक्र से गुजरता पड़ता है। इसी तरह कपास, सीमेंट, स्टील, तांबा व क्रूड ऑयल जैसे हर जिन्स से जुड़े उद्योग और उनमें सक्रिय कंपनियों को भी चक्र से गुजरना पड़ता है। आज ऐसे ही उद्योग की एक कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग इसलिए कर रहे हैं ताकि बाज़ार से कमा सकें। मगर पूंजी ही न रही तो कमाएंगे कैसे और किससे? इसलिए अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलनी है, यह लक्ष्य बहुत साफ होना चाहिए। इस लक्ष्य से जो भी भावनाएं भटकाती हैं, उनके प्रति आप जितना सचेत होते जाएंगे, पूर्वाग्रहों से मुक्त होते जाएंगे, उतना ही आपका निर्णय तर्क व तथ्यपरक होता जाएगा। बाकी बचा बाज़ार का जोखिम तो धीरे-धीरे उसे भी साध लेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

नकारात्मक विचारों, मान्यताओं और भावनाओं की फांस से निकलकर जब आप जो जैसा है, उसे यथाभूत देखने में समर्थ हो जाते हो तो आपको अपने कर्म की कमियां खुद ही दिखने लग जाती हैं। तब प्रतिक्रिया करने के बजाय आप क्रिया को अधिक महत्व देते हो। दूसरों या हालात पर तोहमत लगाने के बजाय अपनी कमियों को दूर करने लगते हो ताकि बाज़ार की प्रतिस्पर्धा में आप हर उन्नीस पर बीस पड़ सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कल और कल के बीच झूलने के बजाय आप जब आज और अभी में जीने लगते हो तब तमाम गिले-शिकवों, परेशानी और बिखरे-बिखरे रहने की स्थिति से मुक्त हो जाते हो। तब आपका ध्यान भटकता नहीं। आप हर काम पूरा ध्यान लगाकर करते हो और सार को पकड़कर थोथी चीजें उड़ा देते हो। तब आपका ज़ोर हमेशा जमीनी हकीकत और वास्तविकता को जानने पर रहता है। इसका लाभ ट्रेडिंग में भी मिलता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार व भावनाओं में संतुलन आने लगता है और जो जैसा है, उसे आप वैसा ही देखने लगते हैं। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी