बाज़ार की कमाई रुपए ने ज़ीरो बनाई
एफआईआई का भारतीय शेयर बाज़ार व बांडों से निकलना दुष्चक्र जैसा है। उनकी निकासी से देश में डॉलर की मात्रा घट जाती है तो डॉलर महंगा और रुपया सस्ता हो जाता है। अप्रैल के शुरू में जो डॉलर 65 रुपए का हुआ करता था, वो बाद में 68.70 रुपए तक चला गया। नीतजतन, रुपए में 5.69% अधिक कमाई भी एफआईआई के लिए डॉलर में ज़ीरो हो गई। बाज़ार गिरने की मार अलग से। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
यहां गुब्बारा फूटने का डर, वहां शांति
अमेरिका में ब्याज दरें आगे बढ़ सकती हैं। इसलिए वहां के सरकारी बांडों पर यील्ड का बढ़ना तय है। वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था की फौरी कमज़ोरी व राजनीतिक दुविधा उम्मीद के बल पर जमकर फूले शेयर बाज़ार को दबा सकती है। केयर रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 की तिमाही में 1377 लिस्टेड कंपनियों की शुद्ध बिक्री के बढ़ने की दर घटकर 9.1% पर और शुद्ध लाभ मार्जिन 6.3% आ गया है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी
ज्यादा रिटर्न जहां, निवेशक जाएं वहां
दुनिया का हर निवेशक कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाना चाहता है। विदेशी निवेशक भी इसी चाहत के वास्ते भारत से निकलने लगे हैं। अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित मुद्रा और अमेरिकी सरकार के ट्रेडरी बांडों को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। दस साल के अमेरिकी बांड पर यील्ड अभी 2.92% चल रही है, जबकि पंद्रह दिन पहले 3.12% तक चली गई थी। वहीं भारतीय रुपए व बाज़ार की हालात डांवाडोल है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
क्यों खिसकने लगे हैं विदेशी निवेशक
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई या एफआईआई) भारत से खिसक रहे हैं। इस साल जनवरी से लेकर अब तक वे हमारे ऋण व इक्विटी बाज़ार से 32,521 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। इसमें से 29,776 करोड़ रुपए तो उन्होंने केवल मई माह में ही निकाले हैं जिसमें से 10,061 करोड़ रुपए इक्विटी, 19,654 करोड़ रुपए ऋण और 61 करोड़ रुपए हाइब्रिड प्रपत्रों से निकाले गए हैं। आखिर उनके इस बर्ताव की वजह क्या है? अब सोम का व्योम…औरऔर भी
नकारात्मकता जीतें, निवेशक बनें
निवेश का मतलब बाज़ार या किसी दूसरे को हराकर आगे बढ़ना नहीं है। इसका सीधा-सा मतलब है कि अपने को जीतना, अपनी नकारात्मक वृत्तियों पर विजय हासिल करना। जब हम अपने पर विजय हासिल कर लेते हैं और संपूर्ण इंसान बन जाते हैं, तभी हम सच्चे अर्थों में निवेशक बन पाते हैं। तब हम वर्तमान के यथार्थ धरातल पर खड़े होकर सारे रिस्क को समझते हुए भविष्य की योजना बनाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी






