बाज़ार में खिलाड़ियों के खेल और संतुलन को जानने के साथ ही यह बात मन में कहीं गहरे बैठा लेना चाहिए कि  ट्रेडिंग और निवेश मूलतः प्रायिकता के खेल हैं। यहां कुछ भी पक्का नहीं। अनुमान व संभावना चलती है। आंख मूंद छलांग लगाने से सबसे अच्छा पाने की उम्मीद आत्मघाती है। शेयर बाज़ार में अच्छी तरह गिना व समझा गया रिस्क लिया जाता है, जिसमें रिटर्न की प्रायिकता कभी शत-प्रतिशत नहीं होती। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश से जुड़े ज्ञान को कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। सबसे पहले तो यह जानना ज़रूरी होता है कि वित्तीय बाज़ार काम कैसे करता है। यहां कौन-कौन से मुख्य खिलाड़ी सक्रिय हैं और रिटेल ट्रेडरों व निवेशकों से लेकर म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बैंकों, प्रोफेशनल ट्रेडरों, ब्रोकिंग हाउसों व विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की क्या भूमिका व वजन होता है। उनके ऑर्डर फ्लो को समझना होता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ज्ञान पढ़कर पाया जा सकता है। लेकिन कौशल तो केवल अभ्यास से हासिल किया जा सकता है। यह अभ्यास किसी गुरु की देखरेख में हो तो सबसे अच्छा है। लेकिन ज़माने के सारे गुरु जब स्वार्थों से बंधे हों, तब कौशल में पारंगत होने के लिए एकलव्य ही बनना पड़ता है। नियम और अनुशासन गुरु का काम करते हैं, जबकि उनका पालन करते हुए निरंतर अभ्यास से हम हुनरमंद बनते चले जाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट का यह कहना शेयर बाज़ार का नीति-वाक्य बन चुका है कि जब सभी डर कर बेच रहे हों, तब लालची बन खरीद लेना चाहिए और सभी लालच में फंसे हों, तब बेचकर निकल लेना चाहिए। ऐसा सटीक मौका कभी-कभार ही मिलता है। लेकिन अपने यहां बीते हफ्ते घबराहट में चली बिकवाली ने लालची बनने के कुछ ऐसे ही मौके पेश कर दिए हैं। आज तथास्तु में उन्हीं में से एक मौका…औरऔर भी

दुनिया-जहान के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए दो चीज़ें ज़रूरी होती हैं। पहली है ज्ञान और दूसरी है कौशल या हुनर। यह बात वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। इनमें से किसी एक चीज़ का होना और दूसरी का न होना ऐसा अधूरापन है जो मंज़िल तक नहीं पहुंचा सकता। विषय की जानकारी और उससे संबंधित ज्ञान बुनियाद है। लेकिन सफलता की इमारत केवल बुनियाद से नहीं बनती। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी