हमारे शेयर बाज़ार की हालत इन दिनों डांवाडोल चल रही है। सुबह का जोश शाम तक ठंडा पड़ जाता है। दरअसल अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति ने इधर बाज़ार को ज़मीन पर उतारना शुरू कर दिया है। लगता है कि जैसे उस पर नकारात्मक तत्वों की साढ़े साती सवार हो गई हो। इस साढ़े साती के काल्पनिक नहींं, सचमुच के कारक हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्हें सुलझाना भी कतई आसान नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

लगातार गिरता रुपया, कच्चे तेल व पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम, विदेशी निवेशकों का निकलते जाना। इन प्रतिकूल स्थितियों से घबराया शेयर बाज़ार क्या जल्दी संभल पाएगा? सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को ऋण देनेवाली आईएल एंड एफएस जैसी बड़ी कंपनी का संकट क्या गुल खिला सकता है? स्मॉंल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों का गिरना कब रुकेगा? इस धुंध भरे महौल में अच्छी कंपनियां भी पीटी जा रही है। तथास्तु में आज इन्हीं में से एक दमदार कंपनी…औरऔर भी

ज्ञान को सफलता तक कौशल पहुंचाता है और कौशल के लिए अभ्यास ज़रूरी है। अभ्यास भी जहां-तहां हाथ मारने का नहीं, बल्कि अनुशासन व नियम में बंधकर चलने का। जिस तरह जीवन सांसों की डोर से बंधा है, उसी तरह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भावों की लय-ताल से बंधी है। भावों की यह डोर पकड़कर हम अभ्यास करते हैं। धीरे-धीरे भावों का पैटर्न और रुख बदलने का ढर्रा समझ में आने लगता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

लंबे निवेश के लिए फंडामेंटल एनालिसिस का सहारा लेना चाहिए, टिप्स का कभी नहीं। ट्रेडिंग के लिए टेक्निकल एनालिसिस की मूल बातों को जान लेना चाहिए। लेकिन बाज़ार में देशी व विदेशी संस्थाओं और नवसिखिया रिटेल ट्रेडरों का संतुलन समझना ज़रूरी है ताकि हम पतंगों की तरह दीए की लौ पर जल जाने के अंजाम से बच सकें। संस्थाओं की राह ही सही राह है। ट्रेडिंग में सफलता की बुनियादी समझ यही है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी