न्यूज़ चैनलों से लेकर तकरीबन सारा मीडिया एकस्वर से कह रहा है कि मोदी सरकार को भले ही कम बहुमत मिले, लेकिन वो दोबारा पांच साल के लिए सत्ता में आ रही है। मगर, बाज़ार न तो मीडिया की तरह बिका हुआ है और न ही वहां हवाबाज़ी ज्यादा चलती है। इसलिए वहां एक अंतर्धारणा यह भी ज़ोर मार रही है कि केंद्र में कांग्रेस के इर्दगिर्द महागठबंधन की सरकार बन सकती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

लोकसभा चुनावों का आगाज़ होने में आज को मिलाकर अट्ठारह दिन बाकी है। इन अट्ठारह दिनों में पक्ष-विपक्ष के दावों-प्रतिदावों की महाभारत जारी रहेगी। इस दौरान कुछ सनसनीखेज़ खुलासे भी हो सकते है। सात चरणों के मतदान के बाद नतीजे 23 मई को घोषित होंगे। लेकिन एक बात अच्छी तरह याद रखें कि कुछ दिनों के झंझावत के अलावा इन चुनावों का शेयर बाज़ार पर कोई खास असर नहीं होने जा रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अगर आप शेयर बाज़ार में यह सोचकर निवेश कर रहे हैं कि बराबर हर साल मुनाफा कमाते रहेंगे तो यह भ्रम फौरन मन से निकाल दीजिए। हकीकत यह है कि यहां बड़े से बड़े दिग्गज़ निवेशकों को भी घाटा खाना पड़ता है। बीते साल 2018 में अपने यहां जिस तरह मिडकैप व स्मॉल-कैप शेयरों की अंधाधुंध धुनाई हुई है, उसमें अधिकांश धुरंधर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर घाटा सहना पड़ा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

जहां सब कुछ एकसाथ अलग-अलग दिशाओं में इतनी तेज़ी से बदल रहा हो, वहां हम पल-पल के भावावेश में फंसे रहे तो रिस्क लेने के बावजूद सही दांव कभी नहीं पकड़ सकते। इतने झंझावात के बीच अगर सही सूत्र पकड़ना है तो उसके लिए समता भाव को आत्मसात करना ज़रूरी है। न राग, न द्वेष। न दोस्ती, न दुश्मनी। जो जैसा है, उसे समभाव से वैसा ही देखने की अंतर्दृष्टि हासिल करनी पड़ेगी। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी