शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों की कमी नहीं है। आम तौर पर नाम व काम के दम पर उनके शेयर काफी महंगे होते हैं। लेकिन कभी-कभी खराब आर्थिक हालात या कंपनी के कामकाज में तात्कालिक समस्याओं से उपजी निराशा के चलते उनके शेयर गिरकर ज़मीन पर आ जाते हैं। ऐसे वक्त में इन कंपनियों के शेयर खरीद लेने में समझदारी हैं क्योंकि उनका दीर्घकालिक भविष्य मजबूत बना रहता है। आज तथास्तु में ऐसे ही एक ब्लूचिप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाजार की बुनियादी संरचना ही ऐसी है कि वह हमेशा लंबे समय में ऊपर जाता है। खासकर भारत जैसे संभावनाओं से भरे विकासशील देश के लिए तो यह अमिट सच्चाई है। सबको डर है कि अगर मोदी सरकार मई में लोकसभी चुनाव जीतकर दोबारा नहीं लौटी तो शेयर बाज़ार पटरा हो जाएगा। हो सकता है कि ऐसा होने पर बाज़ार को हफ्ते-दस दिन का झटका लगे, लेकिन वह फिर कुलांचे मारने लगेगा। अब शुक्रवार अभ्यास…और भीऔर भी

बाज़ार का स्वभाव बड़ा विचित्र है। जब तमाम मूलभूत कारक बता रहे होते हैं कि कोई स्टॉक या पूरा शेयर बाजार उठने जा रहा है, तभी वह अचानक डूब जाता है। यहां हर गणना फेल है। बाज़ार का यह मनमानापन समझने के लिए हर ट्रेडर को नासिम निकोलस तालेब की किताब ‘ब्लैक स्वान’ ज़रूर पड़नी चाहिए। तालेब ने वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के दशकों के गहरे अनुभव को निचोड़कर यह किताब लिखी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी

बाज़ार का सच कैसे जानें, यह कठिन-कठोर चुनौती है जिसे हर किसी को अपनी लगन व मेहनत से सुलझाना होता है। नौकरी व बिजनेस में धन कमाना उतना कठिन नहीं है, जितना नोट से नोट बनाना जैसा कि हमें शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में करना होता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग बहुत ही ज्यादा रिस्की है। इसमें पुख्ता तैयारी के बिना उतरना आत्मघाती साबित होता है। बाज़ार नौसिखिया लोगों को जमकर पीटता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हमें अगर ट्रेडिंग व निवेश से कमाना है तो सारा ज़ोर यह सीखने-समझने पर लगाना चाहिए कि शेयर बाज़ार कैसे काम करता है और वो अभी कौन-से संकेत फेंक रहा है। इसका अंतिम सूत्र हमें ही निकालना होता है। बिजनेस अखबार, चैनल या इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री में शोर व थोथापन बहुत होता है, जबकि सार न के बराबर क्योंकि आम निवेशकों को सच बताना उनके बिजनेस मॉडल के केंद्र में नहीं है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी