सोच से नहीं, हकीकत से चले बाज़ार
आपको क्या लगता है, बड़े-बड़े दिग्गज क्या बोलते हैं या कोई भी क्या महसूस करता है, शेयर बाज़ार इसकी कतई परवाह नहीं करता। इसलिए हमें कभी भी बाज़ार में अपना अगला कदम तय करते वक्त किसी की बात या अपनी भावना के बजाय ज़मीनी हकीकत को समझने की कोशिश करनी चाहिए। बाज़ार के अचानक गिर जाने की चिंता करना एकदम फालतू है। इस चिंता से ट्रेडिंग या निवेश में कोई मदद नहीं मिलती। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
भावों के जाल में उलझा है मूल्य
समाज है तो बाज़ार है। बाज़ार है तो हर वस्तु या सेवा का मूल्य है। आमतौर पर बाज़ार में किसी सेवा या वस्तु का मूल्य ठीक उस समय उसकी मांग व सप्लाई के संतुलन को सटीक रूप से दिखलाता है। लेकिन शेयर बाज़ार में असली मूल्य अमूमन वर्तमान भावों में नहीं झलकता क्योंकि वे भविष्य के आकलन और कंपनी को लेकर बनी तात्कालिक धारणा को दर्शाते हैं। तथास्तु में आज ऐसे ही भाव-जाल में फंसी एक कंपनी…औरऔर भी
समझनेवाले भरपूर कमाते बाज़ार से
शेयर बाज़ार के स्वभाव को समझनेवाले ट्रेडिंग से भरपूर कमा लेते हैं, बशर्ते उनके पास पर्याप्त पूंजी हो। मेरा एक राजस्थानी मित्र है। शांत स्वभाव। शिक्षा से इंजीनियर, पेश से ट्रेडर। बीस लाख रुपए की पूंजी। हर महीने बाज़ार से औसतन पांच-दस प्रतिशत (एक से दो लाख रुपए) कमा लेता है। सपरिवार मजे में रहता है। अभी-अभी सिंगापुर से दस दिन की छुट्टियां मनाकर लौटा है। इंट्रा-डे नहीं, स्विंग ट्रेडिंग ही करता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
पागल है शेयर बाज़ार, आईना है टेढ़ा!
शेयर बाज़ार हर पल, ठीक उस पल तक उपलब्ध सारी सूचनाओं को दर्शाता है। लेकिन वो बड़ा टेढ़ा-मेढ़ा आईना है जो सूचनाओं के तर्क व विवेकसंगत प्रभाव को नहीं, बल्कि उन्हें काफी कम या बहुत ज्यादा करके दिखाता है। बाज़ार आमतौर पर बुरी खबरों को ज्यादा ही रोता है, जबकि अच्छी खबरों पर बहुत ज्यादा आशावादी हो जाता है। वह अक्सर किसी पागल या हमारे मन के पागलपन की तरह बर्ताव करता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







