अगर खुदा-न-खास्ता अमेरिका में मंदी आती है तो पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ेगा। चीन, जापान व यूरोप में पहले से कमज़ोरी चल रही है। ऐसा होने पर भारतीय निर्यात के बढ़ने की रही-सही आशा भी खत्म हो जाएगी। वैसे भी अपना निर्यात सुस्ती का शिकार हो चुका है। चालू वित्त वर्ष 2019-20 से अप्रैल-जुलाई के पांच महीनों में यह साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में मात्र 3.13% बढ़ा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

आर्थिक मोर्चे से खराब खबरों का आना थम नहीं रहा। घरेलू अर्थव्यवस्था के बाद अब विदेश से भी चिंताजनक संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिका में दशकों बाद छोटी अवधि के बांड लंबी अवधि के बांडों से सस्ते हो गए हैं यानी, छोटी अवधि के बांडों पर ज्यादा अवधि के बांडों से ज्यादा ब्याज मिलने लगी है। इसे आर्थिक मंदी का संकेत माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि मंदी नहीं आनेवाली। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार अर्थव्यवस्था या कंपनी के वर्तमान नहीं, भविष्य को दिखाता है। हमारी अर्थव्यवस्था की हालत इस समय यकीनन खराब है। जहां एक तरफ देश में पहली बार मांग घटी है, वहीं घरेलू बचत में भारी कमी आई है। पर ये स्थिति हमेशा नहीं रहने जा रही। इसमें सुधार का आना पक्का है। समझदार निवेशक इसे देख चुनिंदा कंपनियों में निवेश बढ़ाने लगे हैं। आज तथास्तु में पेश है ऐसे निवेशकों की निगाह में चढ़ी एक कंपनी…औरऔर भी

देश के वित्तीय जगत में एक ऐसा बम सुलग रहा है जो कभी भी फट सकता है। आईएल एंड एफएस का 90,000 करोड़ रुपए का घोटाला होता रहा, लेकिन हमारी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आंख पर पट्टी बांधे रहीं। सरकार ने प्राइस वाटरहाउस कूपर्स पर 55 अभियोग ठोंक दिए, मगर सब कुछ शांति से चलता रहा। इधर सरकारी संस्थान स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन और इस्पात इंडस्ट्रीज के मालिक प्रमोद मित्तल का घोटाला चर्चा में है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी