साधना का वक्त तो चंद दिन फुरसत
दोस्तों! आज, शनिवार से दस दिन की तीसरी विपश्यना साधना करने जा रहा हूं। 4 सितंबर को यह साधना शिविर खत्म होगा। इसलिए ट्रेडिंग बुद्ध का कॉलम 26 से 30 अगस्त (पांच दिन) और उसके बाद 3-4 सितंबर (दो दिन) नहीं आएगा। 2 सितंबर को बाज़ार गणेश चतुर्थी के मौके पर बंद है। कल रविवार को आनेवाला तथास्तु आज ही प्रकाशित किया जा रहा है, जबकि अगले रविवार का तथास्तु 4 सितंबर, बुधवार को दोपहर बाद आएगा।औरऔर भी
इस रात की सुबह ज़रूर होगी
शेयर बाज़ार की नब्ज़ डूबती जा रही है। बाज़ार बराबर उठते-उठते गिर जाता है। न अंदर की खबर दिलासा दिलाती है, न बाहर की खबरें उम्मीद जगाती हैं। गिनती नहीं कि कितनी कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते ही नहीं, ऐतिहासिक तलहटी के आसपास हैं। लेकिन निराशा व हताशा का यह दौर अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदने का अच्छा मौका दे रहा है। यकीन मानें, इस रात की सुबह ज़रूर होनी है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
लोगों की बचत घटी, देनदारियां बढ़ीं
इधर कई सालों से मुद्रास्फीति कम चल रही है। इससे आम लोगों की बचत बढ़नी चाहिए थी। लेकिन हाउसहोल्ड बचत बीते दस साल में जीडीपी के 23.6% से घटकर 17.2% पर आ गई, जबकि इनकी देनदारियां बेतहाशा बढ़ गई हैं। लोगबाग कर्ज लेकर अपनी खपत का इंतज़ाम कर रहे हैं। 2015-16 से 2017-18 तक के मात्र दो साल में उनका कर्ज 3.85 लाख करोड़ से लगभग दोगुना 7.41 लाख करोड़ रुपए हो गया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
कम दरों के बावजूद बढ़ा ब्याज बोझ
रिजर्व बैंक बराबर ब्याज दर घटा रहा है। फिर भी इस साल अप्रैल-जून की तिमाही में कॉरपोरेट क्षेत्र को 22.16% ज्यादा ब्याज अदा करना पड़ा। ये आंकड़ा 2179 कंपनियों के सैम्पल पर आधारित है। इन कंपनियों का शुद्ध लाभ इस दौरान 11.97% घट गया तो उन्होंने सरकार को 10.48% कम टैक्स दिया। यह एक ऐसा दुष्चक्र है जिसमें उद्योग से लेकर उपभोक्ता और सरकार, सभी के सभी फंसे हुए नज़र आ रहे हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
आर्थिक विकास के सारे स्रोत पड़े सूखे
आर्थिक विकास के चार इंजिन होते हैं। सरकारी खर्च, निजी निवेश, निजी खपत और निर्यात। इन चारों इंजिनों की हालत बड़ी संगीन दिख रही है। सरकार को टैक्स भरपूर नहीं मिल रहा तो वह खर्च कहां से बढ़ाएगी। उधार के लिए विदेश की शरण लेने तक की पेशकश हो चुकी है। विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी के आसार हैं तो हम निर्यात बढ़ा नहीं सकते। बचा निजी निवेश और खपत तो वहां भी सन्नाटा! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी





