सेबी की चौकसी, सशक्त बने निवेशक
पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में मार्जिन ट्रेडिंग और शेयरों को गिरवी रखे जाने संबंधी नियम बदल दिए गए हैं। पहले ब्रोकरों को जो अबाधित अधिकार मिले थे, उन्हें अब खत्म कर दिया गया है और आपकी इजाजत के बिना ब्रोकर कुछ नहीं कर सकता। नए नियमों में जहां निवेशक को ज्यादा ताकत दी गई है, वहीं ब्रोकरों से जुड़े तंत्र को ज्यादा पारदर्शी बना दिया है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
शेयर बाज़ार है कितना चिकना घड़ा!
अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता। एशियाई विकास बैंक कहता है भारत की आर्थिक विकास दर इस साल -9% रहेगी। जून में उसका अनुमान -4% का था। कोरोना के बढ़ते प्रकोप से लगता है कि भारत एकाध महीने में दुनिया में अमेरिका को पीछे छोड़ टॉप पर होगा। कोरोना काल में लाखों काम-धंधे बंद, 2.1 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं। उन्हें दोबारा काम मिलने के संकेत नहीं। फिर भी शेयर बाज़ार तेज़! अब तथास्तु में आज की कंपंनी…औरऔर भी
मार्जिन ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ाई गई
सेबी ने मार्जिन ट्रेडिंग की कमियों को दूर करने, उसका रिस्क घटाने और उसमें ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए नए नियम बनाकर तैयार कर लिए। ये नियम 1 अगस्त से लागू होने थे। पर ब्रोकरों के संघ, एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेम्बर्स इन इंडिया (एएनएमआई) के विरोध के चलते ऐसा नहीं हो सका। अंततः इन्हें 1 सितंबर से अपना लिया गया और 1 दिसंबर तक क्रमिक रूप से लागू किया जा रहा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
कार्वी की कलाकारी से कमियां उजागर
मार्जिन ट्रेडिंग की धारणा बुरी नहीं है। लेकिन ब्रोकर नियमों व सिस्टम की कमियों का दुरुपयोग कर निवेशकों का धन कैसे अपना हित साधने में लगा सकते हैं, यह सच साल भर पहले कार्वी घोटाले से उजागर हो गया। इसका दोहराव रोकने के लिए पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने इस साल फरवरी में निवेशकों के शेयरों को ट्रेडिंग और क्लियरिंग सदस्यों या ब्रोकरों के खातों में ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







