किनके खरीदने से संभला हुआ बाज़ार!
शेयर बाज़ार कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। उठना-गिरना उसका स्वभाव है। खरीदने का पलड़ा भारी तो बढ़ता है, अन्यथा गिरता है। इधर एफआईआई/एफपीआई बराबर बेच रहे हैं। मगर बाज़ार ज्यादा गिर नहीं रहा। बढ़ रहा या सपाट बंद हो रहा है। समझना ज़रूरी है कि इस समय किसकी खरीद से बाज़ार संभला हुआ है? अभी वे खरीद रहे हैं जिन्होंने पहले बेच रखा है और शॉर्ट कवरिंग से मुनाफा कमा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
निफ्टी गिरा तो जा सकता कहां तक!
बढ़ता, रुकता, गिरता। इन दिनों बाज़ार की यही चाल है। साथ ही वोलैटिलिटी या चंचलता काफी बढ़ी हुई है। निफ्टी अमूमन 120-140 अंकों के दायरे में घूमता है। वैसे तो अब देश में कोरोना के पीक से उतरने के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन कोरोना का दूसरा झटका आया तो निफ्टी कहां तक गिर सकता है? हल्का आया तो 10,200 तक और तगड़ा झटका आया तो 9600 तक! जानकारों का यही अनुमान है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
गणनाएं व कयासबाज़ी तरह-तरह की
हिचकोले खाते बाज़ार को लेकर तरह-तरह की गणनाएं और कयास चल रहे हैं। कुछ उस्ताद फिबोनाकी संख्याओं के आधार पर बोले कि निफ्टी में 10,800 के आसपास सपोर्ट मिल रहा था तो बीते हफ्ते गुरुवार को 10,805.55 पर बंद होने के बाद उसमें दो दिन से उछाल चल रहा है। टेक्निकल एनालिसिस वालों का कहना है कि निफ्टी में 200 दिनों का मूविंग औसत 10,820 का था तो वहां से सपोर्ट मिल गया। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
मार्च से फूलते गुब्बारे का अंत करीब!
दुनिया के वित्तीय जगत में बढ़ती उथल-पुथल, कोरोना के बढ़ते मामले और अर्थव्यवस्था सुधरने की संभावनाओं पर उठते सवालों ने अपने यहां शेयर बाज़ार के उफान को धीमा कर दिया है। कमोबेश सभी को अंदेशा है कि अब बाज़ार में बड़ा करेक्शन आ सकता है और मार्च के बाद के छह महीनों में फूला गुब्बारा पिचक सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम उन्माद की अवस्था से निकलकर सावधानी की मुद्रा अपना लें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी






