बैंकों व वित्तीय संस्थाओं को किसी भी संदिग्ध सौदे की रिपोर्ट सात दिन में एफआईयू को देनी होती है। ब्रोकरों ने ऐसी बेहद कम रिपोर्ट दाखिल की हैं, जबकि पिछले छह महीने में औसतन प्रतिमाह 7.6 लाख नए निवेशक शेयर बाज़ार में उतरे हैं। इसलिए वित्त मंत्रालय को अंदेशा है कि ब्रोकर अपने ग्राहकों के सौदे छिपा रहे हैं। दरअसल, संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट मिलने पर ही मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट लगाकर जांच होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत काम कर रही वित्तीय खुफिया इकाई के अधिकारियों ने वीडियो लिंक के ज़रिए अगस्त में 20 से ज्यादा प्रमुख शेयर ब्रोकिंग फर्मों से पूछताछ की है। पूछा गया कि संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट (एसटीआर) जमा करने में उन्होंने ढिलाई व कोताही क्यों बरती है। चार खास ब्रोकिंग फर्मों – जेरोधा, रिलायंस सिक्यू., आरकेएसवी सिक्यू. व मोतीलाल ओसवाल के साथ आगे फिर से बैठक की जानी है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

दिन के उजाले की तरह साफ है कि पिछले छह महीनों में शेयर बाज़ार देशी निवेशक संस्थाओं की ज्यादा खरीद के दम पर बढ़ा है। इसमें थोड़ा योगदान एफआईआई का भी है। लेकिन सरकार किसी सार्थक काम में लगने के बजाय देश का ध्यान भटकाने के लिए इसके पीछे काले धन का अंदेशा जता रही है। वित्त मंत्रालय से संबद्ध फाइनेंशियल इंटिलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने ब्रोकरों से संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट मांगी है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस साल मार्च से अब तक विदेशी निवेशक संस्थाओं ने शेयर बाज़ार में शुद्ध रूप से 14,139 करोड़ रुपए डाले हैं, जबकि इसी दौरान घरेलू निवेशक संस्थाओं का शुद्ध निवेश 49,261 करोड़ रुपए रहा है। दोनों का शुद्ध निवेश मिलाकर 63,400 करोड़ रुपए। वहीं, सेंसेक्स और निफ्टी 23 मार्च को तलहटी पकड़ने के बाद से क्रमशः 48.94% और 50.02% बढ़ चुके हैं। सरकार परेशान है कि किसका धन आने से बाज़ार बढ़ा है! अब सोम का व्योम…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था कब वापस पटरी पर आएगी, नहीं बताया जा सकता। लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। वाहनों की बिक्री, एयर ट्रैफिक, टोल संग्रह और रेलवे से माल लोडिंग बढ़ने लगी है। मानसून औसत से बेहतर रहा है तो खरीफ की फसल अच्छी रहेगी। वैसे भी कोरोना संकट में हमारी अर्थव्य़वस्था बढ़ने के बजाय जब 23.9% सिकुड़ गई, तब कृषि की विकास दर 3.4% रही है। आज तथास्तु में कृषि बिजनेस से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी