अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर हो रहा हमला!
एमएसएमई क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, चाहे वो निर्यात हो या रोज़गार सृजन। लेकिन देश के सत्ताशीर्ष पर बारह सालों से बैठा शक्स इस रीढ़ को ही तोड़ने में लगा है। यह कितना बड़ा छलिया है कि सत्ता संभालने के पहले दिन से खुद को इस क्षेत्र को रहनुमा बताता रहा है। इसके झूठ को मीडिया का भोंपू इतना बढ़ा देता है कि उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम हर कोने से त्राहिमाम करते इस क्षेत्र की पुकार किसी कोऔरऔर भी
मैन्यूफैक्चरिंग के बिना सेवा क्षेत्र हवाई!
दुनिया के आर्थिक इतिहास में आज तक विकासशील देश से विकसित देश बनने तक की यात्रा हमेशा मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर सवार होकर ही पूरी हुई है। ब्रिटेन, अमेरिका, जापान व दक्षिण कोरिया से लेकर ताइवान और चीन तक इसी राह से गुजरे हैं। हालाकि चीन अभी तक विकसित देश नहीं बना है। लेकिन अपनी मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर आज वो दुनिया की फैक्टरी बन चुका है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है तो वो मैन्यूफैक्चरिंगऔरऔर भी
डूब रही सांस चैम्पियन एमएसएमई की
देश के जीडीपी में 30.1% योगदान वाले एमएसएमई क्षेत्र की हालत साल-दर-साल खराब होती जा रही है। लेकिन सरकार का जुबानी जमाखर्च बदस्तूर जारी है। इस बार बजट के पहले कर्तव्य में चैम्पियन एमएसएमई बनाने का वादा है। इससे पहले 2025-26 के बजट में कृषि के बाद इसे विकास का दूसरा इंजिन बताया गया। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि 2024-25 में इसका बजट आवंटन ₹22,137.95 करोड़ था, संशोधित अनुमान ₹17,306.70 करोड़ का था और वास्तविक खर्चऔरऔर भी
मोदीराज ईस्ट इंडिया कंपनी पर बीस!
ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिशराज में भारत से कच्चा माल लूटकर बाहर ले जाया गया और अंतिम उत्पाद बनाकर दुनिया भर के बाज़ारों में बेचा गया। इसमें सुगमता के लिए उन्होंने भारत में बंदरगाह व सड़कें बनाई और रेल नेटवर्क तैयार किया। उनकी इस अनीति से भारत के लाखों छोटे उद्योग-धंधे और कारीगर तबाह हो गए। मोदी सरकार भी कमोबेश यही कर रही है। अंतर बस इतना है कि वो विदेशी कंपनियों को भारत में कच्चा मालऔरऔर भी






