निवेशक जानें कंपनी, ट्रेडर दूसरों का दिमाग!
शेयर बाज़ार में निवेशकों और ट्रेडरों का सारा खेल दिमाग का है, प्रायिकता की समझ और रिस्क उठाने की क्षमता का है। लेकिन निवेशक को जहां अपना सारा दिमाग बाज़ार, उद्योग व कंपनी को समझने पर लगाना चाहिए। वहीं, ट्रेडर को सारा दिमाग बाज़ार के साथ-साथ दूसरे ट्रडरों के दिमाग को समझने में लगाना चाहिए। बाज़ार को समझने के लिए उनके पास टेक्निकल एनालिसिस का टूल है, वहीं दूसरों के दिमाग को समझने के लिए लालच वऔरऔर भी
ट्रेडर खुश, निवेशक भी गदगद, तरीका अलग
जिस तरह लम्बे समय में हर किसी का मरना तय है, उसी तरह लम्बे समय में अच्छे बिजनेसवाली कंपनी के शेयर का बढ़ना तय है। लेकिन सालों-साल में होनेवाली यह बढ़त दिन-प्रतिदिन के उतार-चढ़ाव में विभाजित है। सालों-साल में निवेशक कमाता है, जबकि दिन-प्रतिदिन में ट्रेडर। दोनों की मानसिकता व रणनीति अलग होती है और अलग होनी भी चाहिए। मसलन, 27 मार्च 2020 को डाबर का शेयर 385 में खरीदकर जो ट्रेडर हफ्ते भर में 445 परऔरऔर भी
तेज़ी टूटने पर अर्थव्यवस्था को तगड़ा सदमा!
अंधा भी बता सकता है कि शेयर बाज़ार आज की ग्लोबल दुनिया में अर्थव्यवस्था का आईना नहीं रह गया है। शेयरों का चढ़ना-गिरना देशी सरहदों को तोड़कर हर तरफ बह रही विदेशी पूंजी तय करने लगी है। दुनिया भर के शेयर बाज़ार कमोबेश एक लय में उठते-गिरते हैं। इससे निवेश व ट्रेडिंग का रिस्क बहुत बढ़ गया है। यही नहीं, भारतीय शेयर बाज़ार जिस तरह बेरोकटोक चढ़ता जा रहा है, उसने हमारी अर्थव्यवस्था को बेहद नाजुक स्थितिऔरऔर भी
बाज़ार को मथकर विदेशी निकाल रहे मक्खन
हमारे शेयर बाज़ार में दो करोड़ भारतीयों के ऊपर म्यूचुअल फंडों, बैंकों व बीमा कंपनियों के कुल धन पर भी भारी पड़ता है एफपीआई या एफआईआई के रूप में आ रहा विदेशियों का धन। विदेशी निवेशक इस साल जनवरी से लेकर अब तक भारतीय बाज़ार में शुद्ध रूप से लगभग 80,000 करोड़ रुपए लगा चुके हैं। उनके लिए भारतीय शेयर बाज़ार सोने का अंडा देनेवाली मुर्गी है। मुनाफा कमाने के लिए भारत जैसे बाज़ार में आए हैंऔरऔर भी







