दुनिया में कुछ भी अकारण नहीं होता। खासकर वित्तीय बाज़ारों के लिए तो यह खरा-खरा सच है। बाहर हालात को प्रभावित करनेवाले कारण देखने में काफी मुश्किल आ सकती है। लेकिन वित्तीय बाज़ार में कारक गिनती के होते हैं। कोई देखने पर उतर आए तो उन्हें साफ-साफ देख सकता है। हालांकि बावजूद इसके अनिश्चितता का तत्व या कारक वित्तीय बाज़ारों का जरूरी हिस्सा है जिससे कोई बच नहीं सकता। मगर, इसे नाथने के लिए प्रायिकता (Probability) सेऔरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में सक्रिय ज्यादातर लोगों की मानसिकता अब भी सट्टेबाज़ी की है। वे दिमाग से नहीं, किस्मत से खेलते हैं और बेहद लालच व भय की भावनाओं में झूलते रहते हैं तो तमाम शेयरों के भाव अतियों पर घूमते हैं। कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम। ट्रेडिंग में तो कम पर खरीदो, ज्यादा पर बेचो का तरीका चलता ही है। लम्बे निवेश में भी हमें यह रणनीति अपनानी चाहिए। बाज़ार का जैसा स्वभाव है,औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडर बनने की कुछ अपरिहार्य शर्तें व नियम हैं। अगर आप हमेशा आकुल-व्याकुल रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अगर आपको बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है, अक्सर तैश में आकर काम करते हैं, भविष्य व वर्तमान को लेकर हमेशा भयभीत रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए। शेयर बाज़ार समेत समूचे वित्तीय बाज़ार में वही ट्रेडर नियमित रूप से कामयाब होता है जिसने अपना स्वभाव बड़ा संयत बनाऔरऔर भी

पुरानी कहावत है। पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान। भीलन छीनीं गोपियां, वही अर्जुन वही बाण। भीलों के झुंड ने गोपियां छीन लीं और धुरंधर धनुर्धर अर्जुन उनको नहीं रोक पाए। जीवन में भी यही होता है। सबसे तेज़ धावक दौड़ जीत जाए, सबसे ताकतवर योद्धा जीत जाए, ज़रूरी नहीं। इसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडर को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि यहां बहुत सारे कारक काम करते हैं, जिन पर उसका कोई वश नहीं।औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सक्रिय दूसरे खिलाड़ियों का दिमाग पढ़ने के साथ-साथ ट्रेडर को खुद अपने मनोविज्ञान पर बड़ा काम करना होता है। किसी सौदे में जमकर कमा लिया या किसी दिन बड़ा घाटा लग गया, दोनों ही स्थितियों में भावनाओं के अतिरेक पर जाने से बचना है। अक्सर होता यह है कि बड़ा फायदा होने पर हम इतना उन्माद में आ जाते हैं कि सब रंगीन ही रंगीन दिखता है। वहीं, बड़ा घाटा होने पर अंदर सेऔरऔर भी