धन हमारा उछले या डूबे, इनकी रहे मौज!
शेयर बाज़ार का निवेश हमारे-आप के लिए कभी खुशी तो कभी गम का मामला है। शेयर उछलता जाता है तो खुशी होती है, जबकि बहुत सोच-समझकर लिया गया शेयर भी जब डूबने लग जाए या डूबता चला जाए तो हमारा गम हद से पार चला जाता है। लेकिन हमारा धन उछले या डूबे, इससे हर हाल में ब्रोकरों, स्टॉक एक्सचेंजों, सरकार और यहां तक कि पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी तक को बहुत खुशी होती है। कारण,औरऔर भी
आज़ादी के जश्न में प्रश्न, फुरसत के चार दिन!
भारत आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश कर रहा है। आप सभी को असीम शुभकामनाएं। लेकिन उल्लास व खुशी के इस मौके पर मनन ज़रूरी है कि हम आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया में 128वें स्थान पर क्यों हैं? दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद भारत आज विश्व फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 142वें स्थान पर क्यों है? ऐसे बहुतेरे सवाल है जिन पर आज हर देशवासी को सोचने की ज़रूरतऔरऔर भी
ब्याज से बंधी शेयरों व ऑप्शंस तक की डोर
शेयर बाज़ार के लिए देश की ब्याज दरों की कितनी अहमियत है, इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि शेयरों का मूल्य निकालने के लिए दुनिया भर में स्वीकृत सीएपीएम (कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल) फॉर्मूले में सरकारी बांडों की ब्याज दर का इस्तेमाल किया जाता है। यह मॉडल रिस्क और रिटर्न के रिश्ते को जानने का मूलाधार है। साथ ही आप्शन प्राइसिंग का सूत्र भी ब्याज दर पर टिका है। इसके लिए बाकायदा ब्लैक-शोल्स फॉर्मूलाऔरऔर भी
बैंक व एनबीएफसी बहुत दमदार हैं निफ्टी में
ब्याज दरों की भ्रामक स्थिति का सीधा असर बैंकों व गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर पड़ना तय है। चूंकि निफ्टी-50 में बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं का भार सबसे ज्यादा 37.17% है तो इसका असर सारे बाज़ार पर पड़ेगा। सरकारी बांडों में लगभग सारा का सारा निवेश बैंकों का है तो बांडों के दाम घटने से उन्हें इसका प्रावधान करना पड़ेगा। साथ ही लोगों की बचत खींचने के लिए बैंकों को डिपॉजिट पर ब्याज दर बढ़ानी पड़ेगी। इसकीऔरऔर भी







